
रामायण जय मन्त्रम्

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राम स्तोत्र
(सुन्दरकाण्ड सर्गः ४२, श्लो-३३)
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः ।
राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः ॥ १ ॥
दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः ।
हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः ॥ २ ॥
न रावणसहस्रं मे युद्धे प्रतिबलं भवेत् ।
शिलाभिस्तु प्रहरतः पादपैश्च सहस्रशः ॥ ३ ॥
अर्दयित्वा पुरीं लङ्कामभिवाद्य च मैथिलीम् ।
समृद्धार्थो गमिष्यामि मिषतां सर्वरक्षसाम् ॥ ४ ॥
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