
अमावस्या पर कुछ साधारण उपाय, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी को

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पूजा
अमावस्या पर कुछ साधारण उपाय, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी को
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि को बेहद महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। सभी पुराणों में अमावस्या को पितृों की तिथि कहा गया है। अमावस्या पर पितृ पूजा से समस्त प्रकार के सुख और सौभाग्य प्राप्त होते हैं। इसके अलावा अमावस्या पर शिव की विशेष पूजा, दुर्गा माता के मंत्रों की साधना और अन्य कई तरह की तंत्र पूजाएं की जा सकती है। हालांकि यदि आप किसी बड़ी पूजा को नहीं करना चाहते हैं, तो अमावस्या पर कुछ साधारण उपायों से काफी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जानिए अमावस्या पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय -
- अमावस्या पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए आटे की गोलियां बनाएं और तालाब या नदी में मछलियों को खिलाएं। इससे आर्थिक लाभ होता है।
- इस दिन किसी गरीब व्यक्ति को भोजन जरूर करवाएं। अन्नदान को पुराणों में महादान कहा गया है।
- काली चींटियों को आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कम होंगे और आगे के लिए मार्गदर्शन मिलेगा।
- कालसर्प दोष निवारण के लिए अमावस्या पर चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें। राहु और केतु के मंत्रों का जाप करें और सफेद फूलों के साथ नाग-नागिन को बहती नदी में प्रवाहित कर दें।
- अमावस्या पर शाम के समय घर के इशान कोण में एक घी का दीपक प्रज्वलित करें। दीपक की बत्ती लाल रखें और इसमें केसर डालें। इससे कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।
- अमावस्या पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा लगाएं।
- अमावस्या पर पितृ सुक्त का पाठ करें।
- अमावस्या पर पितृों के निमित्त किसी भी मंदिर में फल, गेहूं या अन्य सामान दान जरूर करें।
सोमवती और शनि अमावस्या का होता है महत्व
हर महीने अमावस्या आती है, लेकिन जब अमावस्या का पर्व सोमवार को आता है, तो सोमवती अमावस्या कहलाता है। सभी अमावस्याओं में सोमवती अमावस्या का महत्व बहुत अधिक है। सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करके दान करने का महत्व है। सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
साल 2024 में आखिरी सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर को है।
वहीं जब अमावस्या शनिवार के दिन आती है, तो शनिचरी अमावस्या कहलाती है। ज्योतिष शास्त्र में शनिवार को आने वाली अमावस्या का भी महत्व बहुत ज्यादा है। इस दिन शनि देव की पूजा का विधान है। इस दिन शनिचरी अमावस्या पर सरसों के तेल का दान करना चाहिए। वहीं शनि से जुड़े मंत्रों का जाप करने से शनि की महादशा, अंतर्दशा और गोचर में काफी अच्छे परिणाम मिलते हैं। शनिवार को आने वाली अमावस्या पर शाम के समय पीपल के पेड़ के पास दीपक प्रज्वलित करके आने वाले दिनों के लिए प्रार्थना करना चाहिए।
राशि के अनुसार कैसे करें अमावस्या के उपाय
राशि के अनुसार भी आप अमावस्या पर कुछ उपाय करके अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। हम यहां आपको बता रहे हैं आप राशि के अनुसार अमावस्या पर क्या उपाय करें।
मेष- यदि आपकी राशि मेष है, तो आपको अमावस्या पर पितृों के लिए लाल फलों का दान करना चाहिए। साथ ही शिव मंदिर में तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।
वृषभ - यदि आपकी राशि वृषभ है, तो आप अमावस्याा पर दूध का दान करें। साथ ही बच्चों को सफेद मिठाई बांटें।
मिथुन - मिथुन राशि के लोग अमावस्या पर हरे कंबल का दान करें। ऐसा करने से आपके व्यापार और नौकरी में उन्नति होगी।
कर्क - कर्क राशि के लोग अमावस्या पर खीर बनाकर किसी मंदिर में भोग लगाएं। बाद में इस खीर को प्रसाद के रूप में बांट दें।
सिंह- सिंह राशि के लोग अमावस्या पर गायत्री मंत्र का जाप करें। इसके बाद पितृ सुक्त के 11 पाठ करें।
कन्या - कन्या राशि के लोग अमावस्या पर गोशाला में गायों को हरा चारा खिलाएं। साथ ही पितृों का नाम लेते हुए कुछ दान जरूर करें।
तुला- तुला राशि के लोग अमावस्या पर सफेद धोती किसी पुरोहित को उपहार स्वरूप दें। साथ ही सफेद मिठाई का दान करें।
वृश्चिक - यदि आपकी राशि वृश्चिक है, तो आपको अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करके भगवान शिव के मंदिर में पूजा करना चाहिए। इस समय आप रुद्राभिषेक करवा सकते हैं।
धनु- धनु राशि के लोग अमावस्या पर विद्यार्थियों को उनकी जरूरत का सामान दें, इससे आपके जीवन की कई परेशानियां दूर होगी।
मकर- मकर राशि के लोगों को पितृ सुक्त का पाठ पढ़ना चाहिए। साथ ही अमावस्या पर पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें।
कुंभ- कुंभ राशि के लोगों को भगवद् गीता का पाठ करके अपने पितृों को समर्पित करना चाहिए।
मीन- मीन राशि के लोगों को किसी पुरोहित या पंडित को जरूरत का सामान दान करना चाहिए।
अमावस्या पर करने वाले पितृ मंत्र
- ॐ पितृ देवतायै नम:।
- ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च
नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम: ।।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।