
वक्री बुध - जानिए आपकी कुंडली पर इसका असर

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वक्री बुध - जानिए आपकी कुंडली पर इसका असर
सावन में शनि के बाद अब ग्रहों के राजकुमार बुध भी वक्री होंगे। बुध का वक्री होना कई लोगों को विशेष लाभ दे सकता है। बुध को बुद्धि, संचार व व्यापार आदि का कारक माना गया है। बुध 18 जुलाई को सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर कर्क राशि में वक्री होंगे । आप अपनी कुंडली में देख सकते हैं कि कर्क राशि किस भाव में आती है। यहां दिया गया प्रिडिक्शन कुंडली के भाव के आधार पर है। ज्योतिष में उल्लेखित 12 भाव के मुताबिक देखा जाए तो वक्री बुध का प्रभाव अलग –अलग होता है।
वक्री बुध - किस भाव में क्या फल
- पहले भाव में वक्री बुध का विराजमान होना जातक के लिए सही नहीं माना जाता है। ज्योतिषों की माने तो ऐसे में जातक गलत फैसले कर बैठता है जिससे उसे हानि का सामना करना पड़ता है।
- दूसरे भाव में बुध का वक्री (Mercury Retrograde) होकर बैठना जातक को बुद्धिमान बनाता है। जातक अपने फैसलों को लेने से पूर्व गहन विचार करता है। जातक तार्किक होता है।
- कुंडली के तीसरे भाव में वक्री बुध का होना जातक को निर्भिक बनाता है। जातक के आत्मबल में वृद्धि करता है। जातक जोखिम भरे कार्यों को करने में अधिक रूचि दिखाता है।
- बुध का वक्री होकर कुंडली के चौथे भाव भाव में विराजना जातक के लिए धन लाभ की संभवना बनाता है। लेकिन जातक विलासता के साथ जीवन भी यापन करने में लिप्त हो सकता है।
- पांचवे भाव में वक्री बुध का बैठना शुभ माना जाता है। साथी के साथ संबंध बेहतर होते हैं। परिवार में सुख समृद्धि आती है।
- छठे भाव में यदि वक्री बुध बैठा है तो ऐसे में जातक को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। जातक सभी को संदेह की दृष्टि से देखता है। विश्वास करने में परेशानी होती है।
- कुंडली के सांतवे भाव में बुध का वक्री होकर बैठना जातक के जीवन में आकर्षक साथी के आने व प्राप्त होने की ओर संकेत करता है। ऐसे जातक को खूबसूरत जीवनसाथी मिलती है।
- आठवें भाव में वक्री बुध का होना जातक को धर्म के प्रति उदार बनाता है। जातक को दार्शिनिक दृष्टिकोण देता है। इसके साथ ही जातक आध्यात्म के क्षेत्र में रूचि लेता है।
- कुंडली के नवम भाव में वक्री बुध का विराजना जातक को तर्क संपन्न बनाता है। विवेकवान होते हैं।
- दशम भाव में बुध का वक्री (Mercury Retrograde) होकर विराजना जातक को पैतृक संपत्ती में लाभ दिलवाता है। गरीबी का मूंह नहीं देखना पड़ता है।
- कुंडली के एकादश भाव में वक्री अवस्था में बैठना जातक को लंबी उम्र देता है। जातक अपने जीवन को सुखमय बिताता है।
- द्वादश भाव में वक्री बुध का विराजना जातकों निर्भिक बनाता है। जातक के अंदर किसी का भी भय नहीं रहता है। वह अपने विरोधियों को परास्त करने का मार्ग बनाने में सफल होता है। धर्म में रुचि लेता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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