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गणेश स्तोत्र
सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्रम् (देव कृतम्) भगवान श्रीगणेशजी का प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे देवताओं द्वारा रचित माना जाता है। इसका उद्देश्य जीवन में आने वाली सभी संकटों, बाधाओं और विघ्नों का नाश करना है। यह स्तोत्र साधक के मन, बुद्धि और कर्म को पवित्र करता है और उसे भय, अशांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्त करता है। इसके कई लाभ जीवन में देखने को मिलते हैं।
जीवन के सभी संकट और विघ्न दूर होते हैं। मानसिक शांति, आत्मविश्वास और निर्णय शक्ति बढ़ती है। कार्य-सिद्धि, धन-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साधक को भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। नियमित पाठ से भगवान गणेश का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है और आध्यात्मिक प्रगति तेज होती है। इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से प्रातःकाल या संध्या समय, शांत वातावरण में, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करना शुभ माना जाता है। हर महीने की चतुर्थी को या किसी भी विशेष संकट के समय इसका पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
नमो नमस्ते परमार्थरूप
नमो नमस्तेऽखिलकारणाय ।
नमो नमस्तेऽखिलकारकाय
सर्वेन्द्रियाणामधिवासिनेऽपि ॥ १ ॥
नमो नमो भूतमयाय तेऽस्तु
नमो नमो भूतकृते सुरेश ।
नमो नमः सर्वधियां प्रबोध
नमो नमो विश्वलयोद्भवाय ॥ २ ॥
नमो नमो विश्वभृतेऽखिलेश
नमो नमः कारण कारणाय ।
नमो नमो वेदविदामदृश्य
नमो नमः सर्ववरप्रदाय ॥ ३ ॥
नमो नमो वागविचारभूत
नमो नमो विघ्ननिवारणाय ।
नमो नमोऽभक्त मनोरथघ्ने
नमो नमो भक्त मनोरथज्ञ ॥ ४ ॥
नमो नमो भक्तमनोरथेश
नमो नमो विश्वविधानदक्ष ।
नमो नमो दैत्यविनाशहेतो
नमो नमः सङ्कटनाशकाय ॥ ५ ॥
नमो नमः कारुणिकोत्तमाय
नमो नमो ज्ञानमयाय तेऽस्तु ।
नमो नमोऽज्ञानविनाशनाय
नमो नमो भक्त विभूतिदाय ॥ ६ ॥
नमो नमोऽभक्त विभूतिहन्त्रे
नमो नमो भक्त विमोचनाय ।
नमो नमोऽभक्त विबन्धनाय
नमो नमस्ते प्रविभक्तमूर्ते ॥ ७ ॥
नमो नमस्तत्त्वविबोधकाय
नमो नमस्तत्त्वविदुत्तमाय ।
नमो नमस्तेऽखिल कर्मसाक्षिणे
नमो नमस्ते गुणनायकाय ॥ ८ ॥
इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे चत्वारिंशोऽध्याये देवकृत सङ्कष्टनाशन गणेश सोत्रं सम्पूर्णम् ॥
