सन्तान गणपति स्तोत्रम्

सन्तान गणपति स्तोत्रम्

सन्तान गणपति स्तोत्रम् पढ़ने का सही तरीका यह है कि इसे प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति भाव से विधिपूर्वक पढ़ें। खासकर बुधवार या गणेश चतुर्थी के दिन। इसे पढ़ते समय ध्यान केंद्रित रखें और माता-पिता या परिवार की भलाई के लिए विशेष रूप से सन्तान के सुख और स्वास्थ्य की कामना करें। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से संतान सुख में वृद्धि होती है। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य बनी रहती है, तथा पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही, यह स्तोत्र मानसिक शांति, भय और संकटों से मुक्ति पाने में भी सहायक माना जाता है।

 

 

 

 

नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च ।
सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च ॥ १ ॥

गुरूदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते ।
गोप्याय गोपिताशेषभुवनाय चिदात्मने ॥ २ ॥

विश्वमूलाय भव्याय विश्वसृष्टिकराय ते ।
नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुण्डिने ॥ ३ ॥

एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः ।
प्रपन्नजनपालाय प्रणतार्तिविनाशिने ॥ ४ ॥

शरणं भव देवेश सन्ततिं सुदृढा कुरु ।
भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ॥ ५ ॥

ते सर्वे तव पूजार्थं निरताः स्युर्वरोमतः ।
पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम् ॥ ६ ॥

इति सन्तानगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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