
सफला एकादशी 2025 - सफल होने के लिए करें भगवान विष्णु का यह व्रत

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सफला एकादशी 2025 - सफल होने के लिए करें भगवान विष्णु का यह व्रत
सफला एकादशी 2025 भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है और काम में आ रहीं सभी बाधाएं दूर होती हैं। जो साधक सफला एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें हजारों सालों की तपस्या के बराबर फल मिलता है। साथ ही इसका पालन करने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है।
कब है सफला एकादशी 2025
- सफला एकादशी 15 दिसंबर
- एकादशी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 14, 2025 को 06:49 पी एम बजे
- एकादशी तिथि समाप्त - दिसम्बर 15, 2025 को 09:19 पी एम बजे
सफला एकादशी 2025 व्रत कथा
सफला एकादशी की कथा राजा महिष्मत से जुड़ी है। महिष्मत चंपावती राज्य के राजा थे। राजा का बेटा था लुंभक, जो कि बुरी आदतों में फंसा हुआ था। इस कारण राजा ने अपने बेटे को राज्य से ही निकाल दिया। राज्य से निकाले जाने के बाद लुंभक जंगल में रहने लगा। फल खाकर जैसे-तैसे अपना जीवन चला रहा था। कुछ बाद उसके आचरण में सकारात्मक बदलाव आने लगा। जंगल में रहते समय पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर वह दिन भर भूखा रहा और शाम को भगवान विष्णु को याद कर लिया। इस तरह अनजाने में ही लुंबक ने एकादशी व्रत कर लिया था। इस व्रत के पुण्य से लुंबक के सभी पापों का असर खत्म हो गया। इसके बाद जब राजा महिष्मत को लुंभक के बदले हुए आचरण की जानकारी मिली तो राजा ने अपने बेटे को फिर से अपने महल में बुलवा लिया। इस तरह एकादशी व्रत के पुण्य से लुंभक का जीवन बदल गया, उसे मान-सम्मान के साथ ही अपना राज-पाठ भी वापस मिल गया था।
ऐसे करें एकादशी व्रत
- जो लोग एकादशी व्रत करना चाहते हैं, उन्हें एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की शाम से इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
- दशमी की शाम संतुलित भोजन करें। जल्दी सोना चाहिए, ताकि अगले दिन यानी एकादशी पर सुबह सूर्योदय के समय उठ सकें।
- एकादशी की सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं। घर के मंदिर गणेश जी की पूजा करें।
- भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए एकादशी व्रत करने का संकल्प लें।
- एकादशी व्रत कर रहे हैं तो दिनभर अन्न का त्याग करें। भूखे रहना संभव न हो तो फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं। एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें। विष्णु जी की कथाएं पढ़ें-सुनें।
- एकादशी की शाम को सूर्यास्त के बाद भी विष्णु जी और देवी लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। तुलसी के पास दीपक जलाएं। भजन करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह उठें और विष्णु-लक्ष्मी की पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, दान-पुण्य करें। इसके बाद खुद भोजन करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।