
कुंडली के किस भाव में शनि देता है कैसा फल ?

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ज्योतिष
कुंडली के किस भाव में शनि देता है कैसा फल ?
शनि को ज्योतिष में क्रूर ग्रह कहा गया है, लेकिन शनि वास्तव में न्याय के देवता हैं। वे मनुष्यों को अपने कर्मों के फल देते हैं। यदि शनि शुभ हों, तो व्यक्ति को कई तरह के राजयोग प्राप्त होते हैं। शनि महादशा के अलावा गोचर में आकर भी कई तरह के फल देता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या भी व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालता है। जानते हैं कुंडली के किस भाव में शनि क्या असर देता है -
पहले भाव में शनि
शनि यदि कुंडली के पहले भाव में हो, तो जातक को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता हैं। लग्न में बैठा शनि व्यक्ति को वैरागी बना सकता हैं । ऐसे जातक के सभी कार्य विलंब से होते हैं। जातक चाहकर भी अपना काम सही समय पर नहीं कर पाता । कई बार जातक को ऐसा शनि आलसी बना देता हैं। जातक को एकांतवास पसंद होता हैं । जातक का शनि यदि शुभ हो तो जातक की उन्नति धीरे धीरे होती हैं और ऐसी उन्नति अधिक देर तक जातक का साथ देती रहती हैं।
दूसरे भाव में शनि
शनि यदि कुंडली के दूसरे भाव हों, तो व्यक्ति धीरे धीरे बोलने वाला और विचारों को अपने अंदर छुपाने वाला होता हैं। जातक को धन संपति और पुश्तैनी संपत्ति मिलती है, लेकिन इसमें देर हो सकती है। व्यक्ति को मेहनत अनुसार ही धन की प्राप्ति होती हैं। इन्हें कई बार गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती हैं। दूसरे भाव में शनि के कारण व्यक्ति यदि जातक नशा करें तो जातक की बर्बादी और उसके परिवार को कष्ट होता हैं।
तीसरे भाव में शनि
शनि कुंडली के तीसरे भाव में है, तो जातक पराक्रमी और निडर स्वभाव का होता हैं। व्यक्ति मेहनत करने से डरता तो नहीं हैं। व्यक्ति को अपने मित्रों और पड़ोसियों से लाभ प्राप्त होता हैं। हालांकि अधिकतर यहां शनि अच्छे ही फल करता हैं। यदि शनि अच्छा हुआ तो जातक के लिए मेहनत द्वारा ही अच्छी खासी संपत्ति प्राप्ति होती हैं। साथ ही जातक को गुणवान संतानों की प्राप्ति होती हैं।
शनि चतुर्थ भाव में
शनि यदि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति कई बार कम उम्र में ही संन्यासी बना सकता हैं। ऐसे व्यक्ति के पास पुराना घर या वाहन देखा गया हैं । ऐसे जातक को चिंता और अवसाद किसी न किसी चीज का सताता ही रहता हैं। जातक की माता कुछ रोग हो सकते हैं। यदि ये शनि शुभ होगा तो जातक को प्रतिष्ठित व्यापारी बन सकता है। परेशानियां और बीमारियां लंबे समय तक लगी रहती हैं।
शनि पंचम भाव में
शनि यदि कुंडली के पंचम भाव में है, तो जीवन में प्रेम की कमी हो सकती है। पढ़ाई में भी नुकसान होने लगता है। ऐसे व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी कई बार चोट लग सकती है। हालांकि ऐसा व्यक्ति गुप्त ज्ञान रखता है और शुभ शनि रिसर्च के क्षेत्र में व्यक्ति को काफी नाम देता है।
शनि छठे भाव में
शनि यदि कुंडली के छठे भाव में हो, तो व्यक्ति के लिए शत्रुनाशक होता है। व्यक्ति स्वस्थ रहता है, लेकिन बार ऐसा व्यक्ति ऋण लेकर काम करता है। ऐसे व्यक्ति को ऋण चुकाने में समस्या आ सकती है। कई बार ये लोग विदेश में बहुत अच्छा परफॉर्म करते हैं। यहां बैठा अशुभ शनि व्यक्ति को कोई बड़ा रोग दे सकता है।
शनि सातवें भाव में
शनि यदि कुंडली के सातवें भाव में हो, तो व्यक्ति का विवाह विलंब से होता है। कई बार यहां बैठा शनि व्यक्ति को जल्दी ही डिवोर्स जैसी सिचुएशन में ला देता है। हालांकि कालपुरुष की कुंडली के अनुसार सातवें भाव में शनि उच्च का फल देता है, इसलिए व्यक्ति के जीवन का दूसरा हिस्सा अच्छा होता है।
शनि आठवें भाव में
शनि यदि कुंडली के अष्टम भाव में हो तो जातक की आयु लंबी होती है। शनि देव को अष्टम भाव का कारक भी माना जाता हैं। यहां शनि देव विशिष्ट कारक होते हैं। शनि देव यहां बैठकर जातक को कोई न कोई गुप्त विद्या प्रदान करते हैं। जातक को गुप्त धन या फिर पुश्तैनी धन की प्राप्ति हो सकती हैं। कई बार जातक को गुप्त रोग भी सता सकता हैं। यहां बैठा शनि व्यक्ति को आध्यात्मिक बनाता है।
शनि नवें भाव में
शनि यदि कुंडली में नवम भाव में विराजमान हो, तो जातक को विरक्ति वाले विचार अधिक आते हैं। व्यक्ति को कई बार धार्मिक यात्राएं करना अधिक अच्छा लगता हैं। जातक को एकांत वास करना और अपने में चित्त को लगाना उसे अद्भुत एहसास प्राप्त करवा सकता हैं । जातक का भाग्य देर से जागता है। हालांकि यहां बैठा शनि व्यक्ति को उन्नति जरूर करवाता हैं। यदि अशुभ हुआ तो जातक को पिता संबंधित परेशानियां आती हैं।ट
शनि दशम भाव में
शनि यदि दशम भाव में हो तो व्यक्ति कर्मों पर विश्वास करने वाला होता है। हालांकि कॅरियर की शुरुआत थोड़ी स्लो होती है, लेकिन व्यक्ति जवाबदारीपूर्वक अपने काम करता है। यहां एक बात और कि अच्छा शनि वाला जातक चाहे कितना भी बड़ा आदमी हो लेकिन वह अन्य लोगों से सरल व्यवहार करता हैं और जातक डाउन टू अर्थ होता हैं। शनि यदि किसी पाप प्रभाव में हो, तो व्यक्ति के लिए नुकसानदायक होता है।
शनि एकादश भाव में
शनि यदि एकादश भाव में हो तो जातक को विभिन्न क्षेत्रों से धन लाभ देता हैं। कालपुरुष के अनुसार शनि यहां का स्वामी होता है, इसलिए यहां का शनि शुभ माना जाता हैं। यहां पर बैठा शनि जातक के व्यवसाय में वृद्धि करता हैं। व्यक्ति के मित्रों की संख्या अधिक नहीं होती पर जो भी मित्र होते हैं जातक को लाभ ही प्रदान करते हैं और सही समय पर जातक की सहायता करते हैं। यहां बैठा अशुभ शनि सामाजिक प्रतिष्ठा कम करता है।
शनि द्वादश भाव में
शनि यदि कुंडली के 12वें भाव में है, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति देता है। ऐसा शनि विदेश ले जाता है। यहां शनि व्यक्ति को धन इकट्ठा करने में दिक्कत देता है। कई बार यहां बैठा शनि परिवार से भी दूरी बनाकर रखता है। व्यक्ति में एकांत में रहना पसंद करता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।