29 मार्च से शनि-राहु साथ, देखिए कैसा होगा हाल

29 मार्च से शनि-राहु साथ, देखिए कैसा होगा हाल

29 मार्च से शनि-राहु साथ, देखिए कैसा होगा हाल

ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक ग्रह का अपना महत्व होता है। आज हम बात करेंगे शनि और राहु की युति के बारे में। शनि को अंधकार का ग्रह और राहु को भ्रम का ग्रह कहा जाता है। इस साल 29 मार्च को शनि राशि बदलकर मीन राशि में पहुंचेंगे। इस समय मीन राशि में राहु का गोचर हो रहा है। राहु को किसी राशि का स्वामी नहीं माना जाता है, लेकिन माना जाता है कि राहु मिथुन राशि में उच्च का हो जाता है। इसके साथ ही राहु जब धनु राशि में आता है तो नीच का माना जाता है। राहु को आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्र का स्वामी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। दूसरी ओर, शनि को तुला राशि में उच्च का माना जाता है, जबकि मेष राशि शनि की नीच राशि है। तुला, मकर और कुम्भ शनि की प्रिय राशियाँ मानी जाती हैं। यहां बैठा शनि अशुभ फल नहीं देता है। दोनों ही ग्रह पाप ग्रह हैं, लेकिन जब दोनों की युति बनती है, होता है साढ़ेसाती जैसा दुष्प्रभाव, जानिए यहां   Sahni Shanti Puja  

18 साल तक रहता है राहु का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु पाप ग्रह है। राहु का वर्णन पौराणिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। राहु को भ्रामक ग्रह बताया गया है। कलियुग में इसका प्रभाव व्यापक बताया गया है। राहु को प्रतिबिंबित ग्रह भी माना जाता है। इस ग्रह की अपना कोई वास्तविकता नहीं है। राहु सदैव वक्री अवस्था में रहता है। राहु को इसलिए भी प्रतिकूल माना जाता है क्योंकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु की दशा का प्रभाव जातक को 18 वर्ष तक रहता है। इस दशा में यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में राहु-केतु द्वारा निर्मित कोई दोष हो तो जातक को जीवन में बहुत ही बुरे फल मिलते हैं। राहु जब अन्य ग्रहों के साथ युति बनाता है, तो कई तरह की मुसीबत लेकर आता है। ऐसी ही एक युति शनि-राहु युति है।

शनि-राहु की युति

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि और राहु की युति से शापित योग बनता है। यह एक बड़ा दुर्योग है। माना जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है वह अपने राज छुपा कर रखता है। ऐसे लोग क्या करते हैं कोई नहीं जानता। कई बार ऐसे लोग अपार धन अर्जित करते हैं, तो कई बार वे निर्धन रहते हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में सफलता पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। ये गलत काम करके भी पैसा कमाते हैं। इस योग के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इससे दोष दूर होता है। कुछ विद्वान मानते हैं कि जब भी शनि और राहु की युति होती है तो पिशाच योग बनता है। इन दोनों ग्रहों की व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये किसी की भी जिंदगी बना या बिगाड़ सकते हैं। इसी वजह से लोग इन दोनों ग्रहों से डरते हैं। शनि-राहु की युति से पिशाच योग बनता है। इसके प्रभाव को इसके नाम से ही आसानी से जाना जा सकता है। बता दें कि पिशाच योग बहुत ही खतरनाक होता है। जातकों के जीवन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जो कि इन जातकों के लिए सबसे घातक होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पिशाच योग व्यक्ति के जीवन को बर्बाद कर देता है। ऐसे में अगर आपकी कुंडली में भी यह योग बन रहा है तो पितरों का श्राद्ध विधि से करना चाहिए।

राहु का स्वभाव

राहु का स्वभाव चालाकी वाला है। राहु एक क्रूर ग्रह के रूप में भी जाना जाता है। राहु जब नीच का होता है तो भयंकर रोग भी देता है। राहु से ग्रसित व्यक्ति साहसी, चतुर, धूर्त, स्वार्थी, बातूनी, झूठ बोलने वाला, शत्रुता उत्पन्न करने वाला, धर्म को न मानने वाला, राजनीति में रुचि रखने वाला, लड़ाकू और व्यसनी कहा जाता है।

शनि-राहु की युति से कैसे बचें

- पिशाच योग के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए गाय का दान करें या कन्या का दान करें। - शनि और राहु के शुभ प्रभाव के लिए इनसे जुड़े उपाय करें। मंत्र जाप भी शुभ फल देता है। - कुछ विद्वान कहते हैं कि कुंडली में पिशाच योग भी बन रहा है तो दोनों कान छिदवाकर उसमें सोना के आभूषण धारण करें। - छाया दान करना भी शुभ माना जाता है। तेल के पात्र में अपने आप को देखना और फिर इसे दान करना शुभ रहता है। - पिशाच योग से मुक्ति पाने के लिए व्यक्ति को अंधे को भोजन कराना चाहिए। - कुत्तों को रोटी खिलाएं। साथ ही शराब, मांस आदि से भी दूरी बनाकर रखें। - साथ ही शनि के दुष्प्रभाव को शांत करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। - पिशाच योग के प्रभाव को कम करने के लिए तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गाय और जूता आदि का दान करना लाभकारी माना जाता है। - राहु को जीवन में खराब फल देने से रोकने के लिए दूर्वा, चंदन, नीम, अनार और पीपल के पौधे लगाने चाहिए। Love Report 2025  

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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