क्या होती है शनि की साढ़ेसाती, क्या है बचने के खास उपाय

क्या होती है शनि की साढ़ेसाती, क्या है बचने के खास उपाय

क्या होती है शनि की साढ़ेसाती, क्या है बचने के खास उपाय

साढ़ेसाती का सीधा मतलब है साढ़े सात साल। शनि की साढ़ेसाती साढ़े सात साल तक लोगों को प्रभावित करती है। अक्सर शनि की साढ़ेसाती को लोग कठिन समय मान लेते हैं। हालांकि ऐसा बिल्कुल भी पूरी तरह से सत्य नहीं है। फिर भी साढ़ेसाती लोगों के जीवन में कई तरह के परिवर्तन लेकर आती है। यह इसलिए भी है कि इस दौरान लोग मेहनत करना और धैर्य से रहना सीख जाएं। चलिए जानते हैं साढ़ेसाती से जुड़ी सारी बातें -

कब लगती है साढ़ेसाती


शनिदेव जब किसी भी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उससे अगली और पिछली राशि साढ़ेसाती के प्रभाव में रहती है। इसे कुछ इस तरह समझ सकते हैं कि शनिदेव अभी कुंभ राशि में चल रहे हैं, तो कुंभ से एक राशि पहले मकर और एक राशि बाद मीन साढ़ेसाती के प्रभाव में रहेंगी। ज्योतिष में साढ़ेसाती को अशुभ समय माना जाता है।

शनि की साढ़ेसाती होती हैं कष्टदायक!


शनि की साढ़ेसाती के साढ़ेसात साल के समय को थोड़ा कष्टकारक माना जाता है। कुंडली में शनि की स्थिति के अनुसार ही साढ़ेसाती का फल अच्छा या बुरा मिलता है। हालांकि एक सामान्य प्रचलन यही है कि साढ़ेसाती के दौरान आर्थिक कष्ट, वाद-विवाद, नौकरी में नुकसान, बिजनेस में लॉस या रिश्ते टूटने का डर बना रहता है। कई बार अचानक से व्यक्ति को बड़ा नुकसान हो जाता है। 

तीन चरण में होती है साढ़ेसाती


शनि की साढे़साती तीन चरणों में होती है। किसी भी राशि के लिए पहला चरण जब होता है, जब शनि उस राशि से एक राशि पहले किसी राशि में प्रवेश करते हैं। दूसरा चरण जब होता है, जब शनि उसी राशि में प्रवेश करता है और तीसरा चरण तब होता है जब शनि उससे एक राशि आगे की राशि में प्रवेश करता है। कुछ विद्वानों के अनुसार शनि की साढ़ेसाती के तीनों चरणों के फल अलग-अलग होते हैं

साढ़ेसाती के पहले चरण का फल


कहते हैं शनि की साढे़साती का पहला चरण काफी नुकसान दायक होता है। इस समय रिलेशनशिप की दिक्कत होती है। ऐसा माना जाता है कि इस समय शनि सिर पर सवार रहते हैं। काम में मन नहीं लगना, चिड़चिड़ा स्वभाव होना ये सब लक्षण इस चरण के होते हैं।


 साढ़ेसाती के दूसरे चरण का फल


कहते हैं शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण तब आता है। जब शनि आपकी राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय शनि कार्यक्षेत्र पर बुरी तरह प्रभाव डालते हैं। इस अवधि में किसी भी तरह के काम में विलंब होता है और जातक का धैर्य कम होता है।

साढ़ेसाती का तीसरा चरण 


शनि की साढ़ेसाती के तीसरे चरण में शनि पैरों में होते हैं। इस समय खर्चें अचानक से बढ़ने लग जाते हैं। हालांकि शनि को दाता कहा गया है, जाते-जाते शनि व्यक्ति को कई तरह के लाभ भी दे जाते हैं। 


क्या करें शनि की साढ़ेसाती में


- शनि देव की आराधना करें और दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।
- अपने साथ और अधीनस्थ काम करने वालों का सम्मान करें।
- गरीबों की मदद करें और धन देकर उन्हें खुश करें।
- भगवान शिव के मंदिर में प्रतिदिन या हर शनिवार सरसों के तेला का दीपक करें।
- धैर्य से रहें और अपने काम पर ही ध्यान दें।
- गुस्सा होने की जगह मेहनत करें, क्योंकि यहां शनि आपको यही सिखाना चाहते हैं।
- शनिवार का व्रत भी करें।
- प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। 
- कर्म अच्छे रखें, क्योंकि शनि न्याय के देवता कहे जाते हैं।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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