
सावन सोमवार : कब-कब हैं सोमवार, कैसे पाएं शिव कृपा

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पूजा
सावन सोमवार : कब-कब हैं सोमवार, कैसे पाएं शिव कृपा
हिंदू महीने के सबसे प्रिय और शुभ महीनों में से एक है सावन। यह वह समय है जब भारत में प्रत्येक घर शिव की पूजा से वातावरण सुखमय हो जाता है। कुछ पौराणकि कथाओं के अनुसार भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए सबसे पवित्र महीना सावन होता है। कहते हैं इस दौरान ब्रह्मांड शिव तत्वों के ऊर्जावान रहता है। सावन में सोमवार का विशेष महत्व है। साल 2025 में सावन की शुरुआत सोमवार 11 जुलाई से हो रही है, इसलिए इस साल सावन का विशेष महत्व भी है।
सावन सोमवार की तारीख
- सोमवार 14 जुलाई
- सोमवार 21 जुलाई
- सोमवार 28 जुलाई
- सोमवार 4 अगस्त
सावन की कुछ कहानियां
सावन महीने की कुछ कहानियां के अनुसार प्रजापति दक्ष की बेटी सति शिव निंदा सुन लेने के कारण अपने जीवन का बलिदान किया था और हिमालय राज के घर में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया था। पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तप किया और कहते हैं उन्होंने निराहार रहकर शिव की विशेष स्तुति की। तब सावन के महीने में शिव ने उन्हें दर्शन देकर पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। इस साल सावन का यह पवित्र महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। कई जगहों पर रात्रि जागरण करके भी शिव पूजा की जाती है।
सावन की कुछ और कहानी
कुछ जगहों पर सावन के महीने में शिव पूजा की कथा को ‘समुद्र मंथन’ के रूप में दर्शाया गया है। कहते हैं जब भगवान शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए हलाहल विष पिया, तब भगवान शिव का पूरा शरीर जलने लगा, उस जलन से बचाने के लिए देवताओं ने जल से उनका अभिषेक किया और उन्हें राहत प्रदान की, तब से शिव पूजा का यह विशेष पर्व सावन में मनाया जाने लगा है, क्योंकि उस समय सावन का महीना चल रहा था।
क्या है सावन सोमवार का महत्व
सोम यानी कि चंद्रमा। ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है। वे भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। माना जाता है कि भगवान शिव भक्तों के मन को दृढ़ संकल्पित रखते हैं। चंद्रमा शिव के भक्त हैं और चंद्रमा को क्षय रोग से बचाया था और मस्तक पर धारण किया था। सावन सोमवार पर शिवलिंग पूजा से व्यक्ति का मन दृढ़ होता है और उनकी शिव की कृपा से दृढ़ संकल्पित व्यक्ति के समस्त कार्यों की सिद्धि होती है।
किस सामग्री से होगी शिव पूजा
- शुद्ध जल या गंगाजल
- अक्षत
- फूल
- फल
- यज्ञोपवित
- नेवैद्य
- धूप
शिव पूजा विधि
भगवान शिव की पूजा रुद्राभिषेक मंत्रों से की जाती है, लेकिन यदि आप मंत्र पढ़ने में असमर्थ हैं, तो आप शिव के किसी भी स्तोत्र से शिव पूजा का लाभ उठा सकते हैं। आप पूर्व या ईशान कोण में बैठकर शिवपूजन करें। शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पण करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। आप अक्षत अर्पण करें। यज्ञोपवित अर्पण करें। साथ ही शिव का पूजन बेल पत्र से करें।
क्या हैं शिव पूजा के लाभ
- शिव पूजा से हमारी आत्मा शुद्ध हो जाती है।
- शिव पूजा से हमें धन, धान्य प्राप्त होता है।
- शिव को वस्त्र अर्पण करने से हमें वस्त्र और आभूषणों की कभी कमी नहीं होती है।
- शिव को घी से स्नान कराने पर अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
- शिव पूजा शहद और गन्ने या फलों के रस का प्रयोग करने से समृद्धि मिलती है।
भगवान शिव की पूजा में वर्जित
- सिंदूर या कुमकुम : शिवलिंग पर कभी भी कुमकुम या रोली नहीं लगाना चाहिए। उन्हें चंदन अर्पण किया जा सकता है।
- तुलसी : शिव पर तुलसी नहीं अर्पण करना चाहिए। ना ही शिव को भोग लगाते समय तुलसी दल रखना चाहिए।
- शंख (शंख): कई जगहों पर शिव पूजा में शंख बजाना भी पाप माना गया है।
केतकी के फूल- शिव पूजा में कभी भी केतकी के फूल नहीं अर्पण करना चाहिए।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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