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त्यौहार
नवरात्रि के दूसरे दिन चार अक्टूबर को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन मनाया जाएगा। माता जब भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप कर रही थीं, तब उनके रूप को ब्रह्मचारिणी नाम दिया गया। माता की आराधना से जीवन संतुलित और उज्ज्वल बनता है। माता की प्रसन्नता के लिए उपवास रखकर मां के मंत्रों का जाप करना चाहिए। मां की पूजा में किसी भी तरह के विकार मन में नहीं आने चाहिए। मां समस्त आशीर्वाद बेहद जल्दी दे देती है।
मां की पूजा में तप और जप का विशेष महत्व है। स्नान के बाद मां के फोटो पर गेंदे के फूल की माला अर्पण करें। मां की पूजा भोग के रूप में आप बिल्व फल, बेल पत्र या मौसमी फल ही रखें। मां के समक्ष घी का दीया प्रज्वलित करें। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी आपके लिए अच्छा रहेगा।
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥
परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
- यदि कुंडली में मंगल से संबंधित कोई दोष हो, तो माता ब्रह्मचारिणी की पूजा से काफी राहत मिलती है।
- मां की कृपा से आपकी आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- मां नकारात्मक ऊर्जा को आपसे दूर रखती है।
- मां की आराधना से चंचल मन पर नियंत्रण होता है।
- समस्त प्रकार के सुख और ऐश्वर्य का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।
