नवरात्रि के सातवें दिन- माता कालरात्रि की पूजा से बनाएं अपने काम

नवरात्रि के सातवें दिन- माता कालरात्रि की पूजा से बनाएं अपने काम

नवरात्रि के सातवें दिन- माता कालरात्रि की पूजा से बनाएं अपने काम

नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। साल 2024 में नवरात्रि का सातवां दिन 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। जैसा कि माता का नाम है वैसा ही उनका रूप भी है। उनका रूप कुछ-कुछ मां काली की तरह है। मां कालरात्रि की पूजा से समस्त प्रकार की नेगेटिविटी दूर हो जाती है। मां घोर अंधकार से भी काली है। मां समस्त प्रकार के सुख और ऐश्वर्य देने वाली मानी जाती है।

ऐसा है मां कालरात्रि का स्वरूप


मां कालरात्रि का स्वरूप घोर काला है। उनके बाल खुले और बिखरे हुए लगते हैं। कई बार उनका रूप गुस्से वाला बताया जाता है। हालांकि उनकी प्रकृति बेहद शांत है। माता का वाहन गर्दभ (गधा) है। कहते हैं आकाशीय बिजली से भी तेज उनका प्रहार होता है। मधु-कैटभ को मारने में मां का विशेष योगदान था। मां का भय केवल दुष्टों के लिए हैं। अपने भक्तों को परम सौभाग्य देने वाली और विशेष फलदायी मानी गई है। शुभ फल देने के कारण उनका एक नाम शुभंकरी भी है। 

उनकी सांसे हैं आग की ज्वाला

मां जब गुस्से में शत्रु पर आक्रमण करती हैं, तो उनकी श्वास से आग निकलती है। मां की मुद्रा अभय दान देने वाली और वर देने वाली मानी जाती है।  उनके हाथ में कांटों से बना अस्त्र है। एक हाथ में वे खड्ग भी धारण करतीं हैं। मां की आराधना से भूत-प्रेत आदि भाग जाते हैं। राहु, केतु, शनि जैसे ग्रहों की पीड़ा भी मां कालरात्रि की पूजा से दूर हो जाती है। 

बहुत महत्वपूर्ण है महासप्तमी


नवरात्रि का सातवां दिन माता की पूजा का दिन है। इस दिन को महासप्तमी भी कहा जाता है। कई प्रकार के तांत्रिक अनुष्ठान भी महासप्तमी की रात को होते हैं। सप्तमी को सरस्वती आह्वान का दिन भी कहा जाता है। इस विशेष दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। 


देवी कालरात्रि के मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

या

ॐ कालरात्रि देव्ये नमः , इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

कालरात्रि देतीं हैं सिद्धियां
मां कालरात्रि शत्रुओं का विनाश करने वाली हैं। उनका स्मरण करते ही नकारात्मकता दूर हो जाती है। यदि आपको अकेले रहने में डर लगता है, तो आप माता की विशेष आराधना कर सकते हैं। अग्नि, जल, भूत, जंगल, शत्रु, अंधकार, निर्धनता, बीमारी को जीतने की क्षमता यदि प्राप्त करना है, तो माता कालरात्रि की विशेष पूजा जरूर करना चाहिए। राहु की महादशा में मां कालरात्रि की पूजा करने से काफी लाभ होता है। मांको पूजा गुड़ का भोग लगाना चाहिए।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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