शांकभरी पूर्णिमा 2026 - पूजा विधि, कथा, शक्तिपीठ

शांकभरी पूर्णिमा 2026 - पूजा विधि, कथा, शक्तिपीठ

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष मास की पूर्णिमा को शाकंभरी पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। माता शाकंभरी देवी पार्वती का ही एक ममतामयी अवतार हैं। 'शाकंभरी' शब्द का अर्थ है—'जो अन्न और वनस्पति उगाती है'। अकाल के समय ऋषियों और मनुष्यों की रक्षा के लिए मां ने यह रूप धारण किया था।

शाकंभरी पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में शाकंभरी पूर्णिमा 03 जनवरी को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का विवरण इस प्रकार है:
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 02 जनवरी 2026, शाम 06:53 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 03 जनवरी 2026, दोपहर 03:32 बजे तक
  • शाकंभरी पूर्णिमा व्रत तिथि: शनिवार, 03 जनवरी 2026

माता शाकंभरी के प्रमुख शक्तिपीठ और मंदिर

भारत में मां शाकंभरी के कई प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं, जिनका ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है:

1. सहारनपुर शक्तिपीठ (उत्तर प्रदेश)

शिवालिक पर्वत श्रृंखला में स्थित यह सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। यहाँ माता शाकंभरी के साथ भीमा, भ्रामरी और शताक्षी देवी भी प्रतिष्ठित हैं।

2. बादामी शाकंभरी (कर्नाटक)

दक्षिण भारत में माता को वनशंकरी देवी के नाम से पूजा जाता है। यह मंदिर बागलकोट जिले के बादामी क्षेत्र में स्थित है।

3. सांभर और उदयपुरवाटी (राजस्थान)

राजस्थान के सीकर जिले में अरावली पहाड़ियों के बीच पांडव युग का मंदिर स्थित है। इसके अलावा जयपुर के सांभर में भी मां का भव्य मंदिर है, जिनके नाम पर सांभर झील प्रसिद्ध है।

पौराणिक कथा: क्यों हुआ शाकंभरी माता का अवतार?

मार्कंडेय पुराण के अनुसार, दुर्गमासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी से चारों वेदों को प्राप्त कर लिया था, जिससे संसार से वैदिक ज्ञान विलुप्त हो गया। पृथ्वी पर 100 वर्षों तक अकाल पड़ा। देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर मां प्रकट हुईं। अकाल की भयानक स्थिति देखकर मां की आंखों से नौ रातों तक अश्रु वर्षा हुई, जिससे नदियां पुनः प्रवाहित हुईं। इसके बाद मां ने अपने शरीर से दिव्य जड़ी-बूटियां, सब्जियां और फल उत्पन्न किए, जिससे पूरी सृष्टि की भूख शांत हुई। इसीलिए वे 'शाकंभरी' कहलाईं।

शाकंभरी पूर्णिमा 2026: पूजा विधि

इस शुभ दिन पर मां की आराधना करने से घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं रहती। पूजन की सरल विधि इस प्रकार है:
  1. स्नान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. स्थापना: एक चौकी पर मां शाकंभरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. अभिषेक: गंगाजल का छिड़काव करें और घी का दीपक जलाएं।
  4. भोग: माता को ताजे फल, हरी सब्जियां और शाक-भाजी का भोग लगाएं।
  5. आरती और कथा: मां की आरती करें और शाकंभरी माता की कथा सुनें या पढ़ें।
  6. दान: पूजा के पश्चात जरूरतमंदों को अनाज और सब्जियों का दान करें।

माता शाकंभरी की आरती

"हरि ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बाजी की आरती कीजो..." देवी की आरती श्रद्धापूर्वक गाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मां का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

शाकंभरी माता का सिद्ध मंत्र

शाकंभरी पूर्णिमा के दिन इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें:
'नीलवर्णा नीलोत्पल विलोचना। मुष्टिं शिलीमुखा पूर्णकमलं कमलालया।।'
लाभ: इस मंत्र के जाप से घर में बरकत आती है और दरिद्रता का नाश होता है।

निष्कर्ष

शाकंभरी पूर्णिमा प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। 03 जनवरी 2026 को मां शाकंभरी की पूजा और फल-सब्जियों का दान करके आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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