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मंत्र
शक्ति उस दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतीक है जो सृष्टि, पालन और संहार तीनों की अधिष्ठात्री है। यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा है। शक्ति मंत्रों के माध्यम से साधक देवी की कृपा प्राप्त कर साहस, सफलता और आध्यात्मिक जागृति प्राप्त करता है।
मंत्र:
सर्वबाधा-विनिर्मुक्तो धन-धान्य-सुतान्वितः।
मनुष्यः मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
अर्थ: हे माँ शक्ति, मेरे जीवन की सभी बाधाओं को दूर करें और मुझे धन, समृद्धि एवं योग्य संतान का आशीर्वाद दें।
मंत्र:
आदि शक्ति, आदि शक्ति, आदि शक्ति नमो नमः।
सरब शक्ति, सरब शक्ति, सरब शक्ति नमो नमः।
कुंडलिनी माता शक्ति, माता शक्ति नमो नमः॥
अर्थ: मैं उस मूल शक्ति को नमन करता हूँ जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और परिवर्तन की आधार है। मैं कुंडलिनी माता शक्ति को नमन करता हूँ जो समस्त प्राणियों की ऊर्जा का स्रोत है।
मंत्र:
सृष्टि-स्थिति-विनाशानां शक्ति-भूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणी नमोऽस्तुते॥
अर्थ: आप वह सनातन शक्ति हैं जो सृष्टि, पालन और संहार का कारण हैं। हे नारायणी, जो समस्त गुणों की अधिष्ठात्री हैं, आपको नमस्कार।
मंत्र:
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि॥
अर्थ: हे माँ देवी, मुझे सौभाग्य, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, रूप, विजय और यश प्रदान करें तथा मेरे शत्रुओं का नाश करें।
मंत्र:
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: देवी काली शक्ति का उग्र रूप हैं जो दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा करती हैं। उन्हें नमस्कार जिनसे क्षमा, बल और दैवी संरक्षण प्राप्त होता है।
शक्ति मंत्र वे पवित्र ध्वनियाँ हैं जो दिव्य स्त्री ऊर्जा — माँ दुर्गा, काली, पार्वती, लक्ष्मी आदि — को समर्पित होती हैं। शाक्त परंपरा में देवी को सर्वोच्च सत्ता माना गया है। वे समस्त ब्रह्मांड की सृजनात्मक और परिवर्तनीय शक्ति हैं। शक्ति मंत्रों के जाप से साधक का आत्मबल जागृत होता है, जीवन में संतुलन, सफलता और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।
नियमित और श्रद्धापूर्ण शक्ति मंत्र जाप से जीवन में आत्मबल, शांति, सफलता और दिव्य संरक्षण प्राप्त होता है। यह साधक के भीतर स्थित सुप्त ऊर्जा को जागृत कर उसे ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ता है।
