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चालीसा
शीतला माता चालीसा का पाठ स्वास्थ्य, शांति और बुखार तथा त्वचा रोगों से रक्षा के लिए किया जाता है। सच्चे भाव से आराधना करने पर माता शीतला सभी पीड़ाओं को शीतल करती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति लाती हैं।
जय जय माता शीतला, दयामयी, शांत स्वरूप।
तन-मन की उष्णता हरो, करो शुद्ध सर्व स्वरूप।।
घर-घर में शांति बरसाओ, सुख-शीतलता दान।
सबके रोग हरो जगदंबे, हो स्वस्थ्य कल्याण।।
जय जय शीतला मातु भवानी,
जगत जननि, दयालु सुजानी।
हरि ले रोग, करे तन ठंडा,
करुणा सागर, कृपा अनंता।।
शीतल दृष्टि से जीवन सुधरे,
मिटे विकार, भय सब उखरे।
जहाँ तुम्हारा नाम पुकारा,
वहाँ न रोग रहा, न दुःख सारा।।
तन-मन की ज्वाला को हरती,
वात-पित्त-कफ दोष निवरती।
बालक रक्षा, दया की धारा,
सुख-शांति बरसे माँ हमारा।।
निर्मल रूप, शीतल काया,
तेरी महिमा जग में छाया।
चौसठ योगिन संग सुहाई,
गूंजे डमरू, जय जय गाई।।
जब फैला रोग भयंकर भारी,
जग में मची हाहाकार पुकारी।
तब तू आई झाड़ू लेकर,
हर ली पीड़ा, जन दुःख देकर।।
भक्त पुकारे भावन से तुझको,
तूने हर ली पीड़ा सबको।
फोड़े-फुंसी मिटे सब रोग,
फैला जग में शीतल योग।।
हे माँ, सबकी पालनहारी,
तू ही जननी, जग की धारी।
सादा अन्न, जल, स्नेह दिखाती,
प्रेम, धैर्य की राह सिखाती।।
माता-पिता स्वरूप तुम्हारा,
जग पालन में आधार तुम्हारा।
तेरी कृपा अमिट अपार,
जो मांगे पाए, करे उद्धार।।
नाम जपे जो श्रद्धा धारी,
मिटे क्लेश, विपदा भारी।
दरिद्र मिटे, सुख-फल पाए,
जीवन में उजियारा छाए।।
रोगी तन हो जाए स्वस्थ,
नेत्रहीन देखे तेज पवित्र।
निःसंतान को पुत्र मिलावे,
दरिद्र जन धनवान बनावे।।
गाँव-नगर में गूंजे जयकारा,
जहाँ विराजे शीतला प्यारा।
रोग-दुःख सब दूर हो जावे,
शांति-शीतलता घर बसावे।।
क्षमा करो माँ अपराध हमारे,
मन में लाओ शांति तुम्हारे।
बुद्धि विवेक सदैव बनाओ,
सेवा भाव मन में बसाओ।।
जो श्रद्धा से चालीसा गावे,
वह सुख-शांति सदा ही पावे।
माँ की कृपा जहाँ बरसाती,
वहाँ न विपत्ति कभी आ पाती।।
जो यह चालीसा प्रेम सहित गावे,
तन-मन रोग न उसको भावे।
माता कृपा से मंगल होए,
घर-घर में सुख-शीतलता रोए।।
हे माँ शीतला, हमारे तन-मन को शीतल करो, घरों में सुख-शांति भर दो, और संसार को स्वास्थ्य, सौहार्द और कल्याण का आशीर्वाद दो।
