शीतला चालीसा

शीतला चालीसा

शीतला माता चालीसा का पाठ स्वास्थ्य, शांति और बुखार तथा त्वचा रोगों से रक्षा के लिए किया जाता है। सच्चे भाव से आराधना करने पर माता शीतला सभी पीड़ाओं को शीतल करती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति लाती हैं।

लाभ

  • बुखार, दाद, खसरा, फोड़े-फुंसी और संक्रामक रोगों से रक्षा।
  • शरीर और मन की गर्मी, चिड़चिड़ापन और बेचैनी से मुक्ति।
  • बालकों के स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा।
  • घर के वातावरण की शुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का नाश।
  • रोगों से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और जीवन में स्फूर्ति।
  • श्रद्धा, धैर्य, और विवेक की वृद्धि।

सरल पूजा-विधि

  • मंगलवार, गुरुवार या शुक्रवार की सुबह स्नान के बाद पूजा करें।
  • ठंडा, सादा भोजन जैसे – चावल, दही, गुड़ या रोटी तथा शुद्ध जल का भोग लगाएँ।
  • घी का दीपक जलाएँ और पीले या सफेद फूल अर्पित करें।
  • एक जल से भरा कलश रखें और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  • आरंभ में दोहा पढ़ें, फिर पूरी चालीसा श्रद्धापूर्वक गाएं या पढ़ें।
  • अंत में विश्व कल्याण की प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।

प्रारंभिक दोहा

जय जय माता शीतला, दयामयी, शांत स्वरूप।
तन-मन की उष्णता हरो, करो शुद्ध सर्व स्वरूप।।
घर-घर में शांति बरसाओ, सुख-शीतलता दान।
सबके रोग हरो जगदंबे, हो स्वस्थ्य कल्याण।।

शीतला माता चालीसा

जय जय शीतला मातु भवानी,
जगत जननि, दयालु सुजानी।
हरि ले रोग, करे तन ठंडा,
करुणा सागर, कृपा अनंता।।

शीतल दृष्टि से जीवन सुधरे,
मिटे विकार, भय सब उखरे।
जहाँ तुम्हारा नाम पुकारा,
वहाँ न रोग रहा, न दुःख सारा।।

तन-मन की ज्वाला को हरती,
वात-पित्त-कफ दोष निवरती।
बालक रक्षा, दया की धारा,
सुख-शांति बरसे माँ हमारा।।

निर्मल रूप, शीतल काया,
तेरी महिमा जग में छाया।
चौसठ योगिन संग सुहाई,
गूंजे डमरू, जय जय गाई।।

जब फैला रोग भयंकर भारी,
जग में मची हाहाकार पुकारी।
तब तू आई झाड़ू लेकर,
हर ली पीड़ा, जन दुःख देकर।।

भक्त पुकारे भावन से तुझको,
तूने हर ली पीड़ा सबको।
फोड़े-फुंसी मिटे सब रोग,
फैला जग में शीतल योग।।

हे माँ, सबकी पालनहारी,
तू ही जननी, जग की धारी।
सादा अन्न, जल, स्नेह दिखाती,
प्रेम, धैर्य की राह सिखाती।।

माता-पिता स्वरूप तुम्हारा,
जग पालन में आधार तुम्हारा।
तेरी कृपा अमिट अपार,
जो मांगे पाए, करे उद्धार।।

नाम जपे जो श्रद्धा धारी,
मिटे क्लेश, विपदा भारी।
दरिद्र मिटे, सुख-फल पाए,
जीवन में उजियारा छाए।।

रोगी तन हो जाए स्वस्थ,
नेत्रहीन देखे तेज पवित्र।
निःसंतान को पुत्र मिलावे,
दरिद्र जन धनवान बनावे।।

गाँव-नगर में गूंजे जयकारा,
जहाँ विराजे शीतला प्यारा।
रोग-दुःख सब दूर हो जावे,
शांति-शीतलता घर बसावे।।

क्षमा करो माँ अपराध हमारे,
मन में लाओ शांति तुम्हारे।
बुद्धि विवेक सदैव बनाओ,
सेवा भाव मन में बसाओ।।

जो श्रद्धा से चालीसा गावे,
वह सुख-शांति सदा ही पावे।
माँ की कृपा जहाँ बरसाती,
वहाँ न विपत्ति कभी आ पाती।।

समापन दोहा

जो यह चालीसा प्रेम सहित गावे,
तन-मन रोग न उसको भावे।
माता कृपा से मंगल होए,
घर-घर में सुख-शीतलता रोए।।

पूजा के नियम

  • मंगलवार या शुक्रवार को नियमित रूप से पाठ करें।
  • रोग मुक्ति के लिए 9 या 21 दिन तक निरंतर पाठ करें।
  • पूजन स्थान पर जल का पात्र रखें और पाठ के बाद कमरे में छिड़कें।
  • बीमारों को औषधि या भोजन का दान करें, यह माँ को अति प्रिय है।

समापन प्रार्थना

हे माँ शीतला, हमारे तन-मन को शीतल करो, घरों में सुख-शांति भर दो, और संसार को स्वास्थ्य, सौहार्द और कल्याण का आशीर्वाद दो।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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