Shiv Rudrabhishek - महाशिवरात्रि पर करें शिव को प्रसन्न

Shiv Rudrabhishek - महाशिवरात्रि पर करें शिव को प्रसन्न

Shiv Rudrabhishek - महाशिवरात्रि पर करें शिव को प्रसन्न

भगवन शिव सबको प्रिय है। एक तरफ वे भोले हैं तो दूसरी ओर महाकाल। वे संन्यासी और वैरागी हैं लेकिन सबसे बड़े प्रेमी भी। भक्तों को उनका हर अंदाज पसंद आता है। भक्त उन्हीं में रम जाना चाहते हैं। महाशिवरात्रि शिव की आराधना का विशेष पर्व है। इस दौरान भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक करते हैं। रुद्राभिषेक वेदों में आए मंत्रों का विशेष संग्रह है। इनका उच्चारण करने से वेद पुरुष यानी शिव बेहद प्रसन्न होते हैं। रुद्राभिषेक बेहद लाभकारी पूजा है। शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक से मनोकामना पूरी करते हैं। रुद्राभिषेक आपको सुरक्षा का विशेष अहसास देता है। रुद्राभिषेक से किसी विशेष फल की प्राप्ति आसानी से की जा सकती है। आज आपको हम बता रहे हैं कि शिव को प्रसन्न करने के लिए कैसे करते हैं रुद्राभिषेक     Sawan Somwar Special Rudrabhishek   क्या होते हैं रुद्राभिषेक के लाभ 1. धन और समृद्धि बढ़ाता है। 2. मनोकामनाएं पूरी होती है। 3. परिवार में खुशियां आती है। 4. कुंडली के तमाम दोष दूर होते हैं।

रुद्राभिषेक के प्रकार (rudrabhishek ke prakar)

भगवान शिव को जल अर्पण करना अभिषेक कहलाता है, लेकिन जब इस अभिषेक में वेद मंत्रों को समाहित कर लिया जाता है, तो वह रुद्राभिषेक कहलाता है। रुद्राभिषेक विभिन्न द्रव्यों के साथ किया जा सकता है। आपको बताते हैं कि रुद्राभिषेक के प्रकार क्या हैं-
  • रुद्राभिषेक – जल भगवान शिव का जल से अभिषेक करने से समस्त मनोकामना पूरी होती है। यह जल सामान्य शुद्ध जल, गंगा जल या किसी पवित्र नदी का जल भी हो सकता है।
  • रुद्राभिषेक – दूध दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु मिलती है। यह दूध गाय का दूध होना चाहिए।
  • रुद्राभिषेक – शहद शहद जीवन में मिठास घोलता है। भगवान शिव का शहद से अभिषेक करने से जीवन में प्रेम प्राप्त होता है। जीवनसाथी के साथ चल रहा तनाव दूर होता है।
  • रुद्राभिषेक -पंचामृत पंचामृत में दूध, दही, मिश्री, शहद और घी को मिलाया जाता है। ये 5 पदार्थ मिलकर पंचामृत बनाते हैं। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने पर व्यक्ति को सफलता, धन और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • रुद्राभिषेक – घी घी से शिव का अभिषेक करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
  • रुद्राभिषेक – दही दही से भगवान शिव का अभिषेक करने से संतान संबंधी समस्या का समाधान होता है।
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रुद्राभिषेक कैसे करें

वैसे तो रुद्राष्टाध्यायी की पुस्तक में दिए मंत्रों के जरिए घर पर कोई भी व्यक्ति रुद्राभिषेक कर सकता है। यदि फिर भी आपको ये मंत्र पढ़ना कठिन लगता है, तो आपको किसी आचार्यों के जरिए रुद्राभिषेक करवाना चाहिए। यदि आप यह रुद्राभिषेक कर रहे हैं, तो वेदों में दिए गए पुरुष सुक्त के पाठ से भी भगवान शिव का विशेष अभिषेक कर सकते है। वेदोक्त पद्धति से रुद्राभिषेक करने से पहले श्रीगणेश और लक्ष्मी की आराधना जरूरी है। पूरे रुद्राभिषेक के मंत्रों के उच्चारण करते समय भगवान शिव पर दूध, जल या गंगाजल की धार गिरती रहनी चाहिए। वहीं बिल्व पत्रों को अर्पण करते रहना चाहिए। पूजा के बाद विशेष दीपक से भगवान की आरती करके भोग अर्पण करना चाहिए।

रुद्राभिषेक कब करें

हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्य से पूर्व शुभ मुहूर्त देख लेना चाहिए। फिर भी आप सावन के अलावा प्रत्येक महीने के किसी भी सोमवार, प्रदोष, एकादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा या अमावस्या पर रुद्राभिषेक करवा सकते हैं। इसके अलावा अपने जन्म दिन पर रुद्राभिषेक करवाना सुखद होता है। प्रत्येक महीने की मासिक शिवरात्रि पर भी शिव रुद्राभिषेक करवाना शुभफलदायक रहता है।

रुद्राभिषेक से ग्रह दोष निवारण

  • - शनि दोष को दूर करने के लिए काले तिल और दूध से शिव का अभिषेक करना चाहिए।
  • - चंद्र दोष को दूर करने के लिए जल से शिव का अभिषेक किया जा सकता है।
  • - बुध के दोष को दूर करने के लिए दही और मिश्री से अभिषेक करना चाहिए।
  • - मंगल दोष दूर करने के लिए गिलोय के रस से शिव अभिषेक करना शुभ रहता है।
  • - शुक्र से संबंधित दोष दूर करने के लिए पंचामृत से शिव का अभिषेक करना चाहिए।
  • - राहु- केतु से संबंधित दोष करने के लिए सामान्य जल या गन्ने के रस से शिव अभिषेक किया जा सकता है।

रुद्राभिषेक के मंत्र

रुद्राभिषेक एक पवित्र अनुष्ठान है। ऋग्वेद, यजुर्वेद में दिए गए मंत्रों से ही शिव का अभिषेक किया जाना चाहिए। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का विशेष जाप करना श्रेष्ठ रहता है। रुद्राभिषेक यदि कोई विद्वान कर रहे हों, तो आप इस दौरान मन में शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप कर सकते हैं। Love Report 2025

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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