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गणेश स्तोत्र
षोडश गणपति स्तवम् भगवान गणेश को समर्पित एक प्राचीन स्तोत्र है, जिसमें उन्हें विभिन्न रूपों और शक्तियों के संदर्भ में पूजनीय बताया गया है। इस स्तोत्र में कुल 16 (षोडश) गणेशों का वर्णन किया गया है और प्रत्येक का विशेष गुण और भक्ति विधि बताया गया है। इसे श्रद्धा और भक्ति भाव से पढ़ने से जीवन में सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं, कार्य सिद्धि होती है, संतान सुख और परिवार की खुशहाली बनी रहती है इसके लाभ कुछ ऐसे हैं।
सभी विघ्न और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
व्यवसाय और अध्ययन में सफलता प्राप्त होती है।
पारिवारिक जीवन में सुख-शांति आती है।
मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रथमो बालविघ्नेशो द्वितीयस्तरुणो भवेत् ।
तृतीयो भक्तविघ्नेशश्चतुर्थो वीरविघ्नपः ॥ १ ॥
पञ्चमः शक्तिविघ्नेशः षष्ठो ध्वजगणाधिपः ।
सप्तमः सिद्धिरुद्दिष्टः उच्छिष्टश्चाष्टमः स्मृतः ॥ २ ॥
नवमो विघ्नराजः स्याद्दशमः क्षिप्रनायकः ।
हेरम्बश्चैकादशः स्याद्द्वादशो लक्ष्मिनायकः ॥ ३ ॥
त्रयोदशो महाविघ्नो विजयाख्यश्चतुर्दशः ।
नृत्ताख्यः पञ्चदशः स्यात् षोडशश्चोर्ध्वनायकः ॥ ४ ॥
एतत् षोडशकं नाम स्तोत्रं सर्वार्थसाधकम् ।
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स सुखी सर्वतो जयी ॥ ५ ॥
तस्य विघ्नाः पलायन्ते वैनतेयाद्यथोरगाः ।
गणेश्वरप्रसादेन महाज्ञानी भवेद्ध्रुवम् ॥ ६ ॥
इति षोडशगणपति स्तवम् ।
