नवग्रह चालीसा

नवग्रह चालीसा

नवग्रह चालीसा का पाठ करने से ग्रह दोषों का निवारण होता है और जीवन में संतुलन, शांति, स्पष्टता और सफलता प्राप्त होती है। श्रद्धा, भक्ति और नियमित अभ्यास के साथ इसका पाठ करने से श्रेष्ठ परिणाम मिलते हैं।

मुख्य लाभ (लाभ)

  • जन्मकुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभावों का संतुलन और निवारण होता है।
  • कार्य क्षेत्र, धन, और प्रतिष्ठा में स्थिरता और प्रगति लाता है।
  • स्वास्थ्य, ऊर्जा, प्रतिरक्षा और मानसिक संतुलन को सुदृढ़ करता है।
  • एकाग्रता, स्मरण शक्ति, संवाद और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है।
  • वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में सौहार्द बढ़ाता है।
  • विलंब, बाधाओं और पुनरावृत्त समस्याओं से मुक्ति देता है।
  • आध्यात्मिकता, अनुशासन और सात्त्विकता में वृद्धि करता है।
  • नकारात्मकता, भय और चिंता से रक्षा प्रदान करता है।

विधि एवं पाठ नियम

  • श्रेष्ठ दिन: रविवार—सूर्य, सोमवार—चंद्र, मंगलवार—मंगल, बुधवार—बुध, गुरुवार—बृहस्पति, शुक्रवार—शुक्र, शनिवार—शनि; राहु—शनिवार या बुधवार संध्या समय; केतु—मंगलवार या गुरुवार प्रातः।
  • समय एवं दिशा: सूर्योदय या सूर्यास्त के समय पूर्व या ईशान दिशा की ओर मुख करें।
  • शुद्धता: स्नान करें, स्वच्छ हल्के वस्त्र पहनें, दीपक और धूप जलाएं।
  • संकल्प: मन में अपनी इच्छा (स्वास्थ्य, शांति, करियर, संतुलन) के लिए संकल्प लें।
  • भोग एवं अर्पण:
    • सूर्य—लाल फूल, गेहूं
    • चंद्र—सफेद फूल, दूध
    • मंगल—मसूर दाल
    • बुध—हरी मूंग
    • बृहस्पति—चना दाल
    • शुक्र—सफेद मिठाई
    • शनि—तिल, सरसों का तेल
    • राहु—काले वस्त्र, उड़द
    • केतु—दूर्वा घास, कुम्हड़ा
  • गणना: 1, 3, 11 या 21 बार पाठ करें। उपाय हेतु 40 दिन तक निरंतर पाठ शुभ है।
  • मंत्र जाप: प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का जाप पाठ के बाद करें तो फलदायक होगा।
  • आचरण: सत्य, दान, संयम और मधुर वाणी का पालन करें।
  • समापन: अंत में आभार व्यक्त करें और समस्त जनकल्याण की कामना करें।

श्री नवग्रह दोहा

श्री गणपति गुरु चरण कमल, प्रेम सहित सिर नाय,
नवग्रह चालीसा कहत, शरद होत सहाय।

जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज,
जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहु अनुग्रह आज।

श्री नवग्रह चालीसा

श्री सूर्य स्तुति

प्रथमहि रवि कहौं नांव मात्था, करहु कृपा जनि जानि अनाथा।
हे आदित्य दिवाकर भानु, मैं मति मंद महा अज्ञानु।
अब निज जन कहौं हरहु कलेशा, दिनकर द्वादश रूप दिनेशा।
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर, अर्क मित्र अघ मोह क्षमाकर।

भावार्थ: हे सूर्यदेव, प्रकाश के स्रोत, अज्ञान दूर करें और जीवन में शक्ति, उत्साह एवं सफलता दें।

श्री चंद्र स्तुति

शशि मयंक रजनीपति स्वामी, चंद्र कलानिधि नमो नमामि।
राकापति हिमांशु राकेशा, प्रणवत जन तन हरहु कलेशा।
सोम इन्दु विदु शांति सुधाकर, शीत रश्मि औषधि निशाकर।
तुमहि शोभित सुंदर भाल महेशा, शरण शरण जन हरहु कलेशा।

भावार्थ: हे चंद्रदेव, शांति और शीतलता के दाता, मन की अशांति हरें और भावनाओं में स्थिरता दें।

श्री मंगल स्तुति

जय जय जय मंगल सुखदाता, लोहित भौम अदिक विख्याता।
अंगारक कुज ऋण हारी, करहु दया यह विनय हमारी।
हे महिसुत क्षितिसुत सुखराशी, लोहितांग जय जन अघनाशी।
अगम अमंगल अब हर लीजै, सकल मनोरथ पूरण कीजै।

भावार्थ: हे मंगलदेव, शक्ति और साहस के दाता, सभी बाधाएं और ऋणों का नाश करें।

श्री बुध स्तुति

जय शशि नंदन बुध महाराजा, करहु सकल जन का शुभ काजा।
दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना, कठिन कष्ट हरि करि कल्याना।
हे तारा सुत रोहिणी नंदन, चंद्र सुवन दुःख द्वंद्व निकंदन।
पूजहु आस दास कहुं स्वामी, प्रणत पाल प्रभु नमो नमामि।

भावार्थ: हे बुधदेव, विवेक, बुद्धि और वाणी की शक्ति प्रदान करें। जीवन में सौम्यता और निर्णयशक्ति दें।

श्री बृहस्पति स्तुति

जयति जयति जय श्री गुरुदेवा, करो सदा तुम्हारी प्रभु सेवा।
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी, इंद्र पुरोहित विद्यादानी।
वाचस्पति बागीश उदारा, जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा।
विद्या सिंधु अंगिरा नामा, करहु सकल विधि पूरण कामा।

भावार्थ: हे बृहस्पति देव, ज्ञान, धर्म और विवेक के दाता, हमें सद्गति और समृद्धि प्रदान करें।

श्री शुक्र स्तुति

शुक्र देव पद तल जल जाता, दास निरंतर ध्यान लगाता।
हे उष्ण भर्गव भृगु नंदन, दैत्य पुरोहित दुष्ट निकंदन।
भृगुकुल भूषण दूषण हारी, हरहु नेष्ट ग्रह करहु सुखकारी।

भावार्थ: हे शुक्रदेव, प्रेम, कला और सुख के दाता, वैवाहिक जीवन में सौहार्द और सुख बनाए रखें।

श्री शनि स्तुति

जय श्री शनि देव रवि नंदन, जय कृष्ण सौरि जग वंदन।
पिंगल मंद रौद्र यम नामा, वप्र आदि कोनस्थ ललामा।
वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा, क्षण महा करत रंक क्षण राजा।
ललाट स्वर्ण पद करत निहाला, हरहु विपत्ति छाया के लाला।

भावार्थ: हे शनिदेव, न्याय और कर्म के स्वामी, हमारे पापों का नाश करें और धैर्य व विनम्रता दें।

श्री राहु स्तुति

जय जय राहु गगन प्रविसैया, तुम्हि चंद्र आदित्य ग्रसैया।
रवि शशि अरि स्वरभानु धारा, शिखि आदि बहु नाम तुम्हारा।
सैहिंके तुम निशाचर राजा, अर्धकायी जग रखहु लाजा।
यदि ग्रह समय पाय कहीं आवहु, सदा शांति और सुख उपजावहु।

भावार्थ: हे राहु देव, छाया ग्रहों के अधिपति, भ्रमों को दूर कर विवेक, यश और सफलता दें।

श्री केतु स्तुति

जय श्री केतु कठिन दुःख हारी, करहु सज्जन हित मंगलकारी।
ध्वज्युत रुंड रूप विक्राला, घोर रौद्र तन अघमन काला।
शिखि तारक ग्रह बलवाना, महा प्रताप न तेज ठिकाना।
वाहन मीन महा शुभकारी, दीजै शांति दया उर धारी।

भावार्थ: हे केतु देव, मोक्ष और ज्ञान के प्रतीक, हमें अंतर्दृष्टि और मानसिक शांति प्रदान करें।

नवग्रह शांति फल

तीर्थराज प्रयाग सुपासा, बसे राम के सुंदर दासा।
कक्रग्राम हिम पुरे तिवारी, दुर्वासाश्रम जन दुख हारी।
नवग्रह शांति लिखो सुख हेतु, जन तन कष्ट उतारन सेतु।
जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगी परम पद पावै।

भावार्थ: जो श्रद्धा पूर्वक इस चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी दुख दूर होते हैं और वह परम आनंद को प्राप्त करता है।

व्यावहारिक सुझाव

  • पाठ धीरे और स्पष्ट उच्चारण के साथ करें। भक्ति को प्राथमिकता दें।
  • यदि किसी विशेष ग्रह का दोष है, तो उसकी स्तुति 11 बार अतिरिक्त करें।
  • प्रत्येक ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान उसके दिन पर करें।
  • मन, स्वास्थ्य और परिणामों का लेखा रखें, सुधार देखें।
  • सत्य, सेवा और संयम से किए गए कर्म पाठ के फल को अनेक गुना बढ़ाते हैं।

समापन प्रार्थना

नवग्रह प्रसन्न हों, उनके प्रकाश से हमारे जीवन में संतुलन, सुख और ज्ञान की प्राप्ति हो। समस्त प्राणी कल्याण को प्राप्त करें।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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