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चालीसा
राम चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है। श्रीराम का स्मरण शांति, साहस, भक्ति और सफलता प्रदान करता है। इस चालीसा का पाठ नकारात्मकता को दूर करता है, समृद्धि बढ़ाता है, और मनुष्य को आध्यात्मिक ज्ञान तथा विजय की शक्ति प्रदान करता है।
आवाहन मंत्र: ॐ श्री रामाय नमः
पाठ से पूर्व दीपक जलाएँ, तुलसी या पुष्प अर्पित करें, और श्रीराम-सीता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें। मन में संकल्प लें — “मैं पवित्र मन, वाणी और कर्म से प्रभु श्रीराम का स्मरण करता हूँ, वे मेरी बुद्धि को पवित्र और स्थिर बनाएं।”
आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वा मृगा काञ्चनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणम्॥
बाली निदालनं समुद्रतरणं लङ्कापुरी दाहनम्।
पश्चाद्रावणं कुम्भकर्ण हननं एतद्धि रामायणम्॥
श्री रघुबीर भक्त हितकारी, सुनि लीजै प्रभु अर्ज हमारी॥
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई, ता सम भक्त और नहीं होई॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं, ब्रह्मा इंद्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना, जासु प्रभाव तिहु पुर जाना॥
जय जय जय रघुनाथ कृपाला, सदा करो संत प्रनत पाला॥
तुम्ह भुजदंड प्रचंड कृपाला, रावण मारी सुरन प्रतिपाला॥
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं, दीनन के हो सदा सहाई॥
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं, सदा ईश तुम्हार यश गावैं॥
चारिहु भेद भरत हैं साखी, तुम भक्तन की लाज राखी॥
गुण गावत शरद मन माहीं, सुरपति ताकौ पार न पाहीं॥
नाम तुम्हार लेत जो कोई, ता सम धन्य और नहिं होई॥
राम नाम है अपारम्परा, चारिहु वेद जहि पुकारा॥
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो, तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥
शेष रटत नित नाम तुम्हारा, मही को भार शीश पर धारा॥
भरत नाम तुम्हार उर धारो, तासो कबहुँ न रण में हारो॥
नाम शत्रुघ्न हृदय प्रकाशा, सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥
लखन तुम्हारे आज्ञाकारी, सदा करत संत रक्षक भारी॥
ताते रण जीते नहिं कोई, युद्ध जुरी यमहुं किन होई॥
महालक्ष्मी धर अवतारा, सब विधि करत पाप को चारा॥
सीताराम पुनित गुन गावा, भुवनेश्वरी प्रभाव दिखावा॥
जो तुम्हारे नित पांव पलोटत, नव निधि चरणन में लोटत॥
सिद्धि अठारह मंगलकारी, सो तुम पर जावै बलिहारी॥
जो तुम्हारे चरणन चित लावै, ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥
सुनहु राम तुम तात हमारे, तुम ही भरत कुल पूज्य प्रचारें॥
राम आत्मा पोषण हारे, जय जय जय दशरथ के प्यारे॥
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा, निर्गुण ब्रह्म अखंड अनूपा॥
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी, सत्य सनातन अंतर्यामी॥
सत्य भजन तुम्हारो जो गावे, सो निश्चय चारों फल पावे॥
सत्य शपथ गौरीपति कीन्ही, तुमने भक्तिह सब सिद्धि दीन्ही॥
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा, नमो नमो जय जगपति भूपा॥
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा, नाम तुम्हार हरत संतापा॥
सत्य शुद्ध देव मुख गाया, बाजी दुंदुभि शंख बजाया॥
याको पाठ करै जो कोई, ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥
आवागमन मिटै तिहि केरा, सत्य वचन माने शिव मेरा॥
और आस मन में जो होई, मनवांचित फल पावै सोई॥
तीनहुं काल ध्यान जो लावै, तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥
साग पत्र सो भोग लगावै, सो नर सकल सिद्धता पावै॥
अंत समय रघुबरपुर जाई, जहं जनम हरि भक्त कहाई॥
श्री हरिदास कहै अरु गाई, सो वैकुंठ धाम को पाई॥
सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।
हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥
राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥
भगवान श्रीराम सत्य, धर्म और करुणा के प्रतीक हैं। उनकी चालीसा हमें धर्म, विनम्रता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। श्रीराम के नाम का स्मरण जीवन के सभी दुखों को मिटाता है और आत्मा को शांति व परम आनंद की अवस्था में पहुँचाता है — हृदय की अयोध्या में।
