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मंत्र
ॐ जनकायै विद्महे रामप्रियायै धीमहि, तन्नो सीता प्रचोदयात्॥
माँ सीता को नमन, जो पवित्रता, त्याग, करुणा और धर्म की मूर्ति हैं। यह गायत्री मंत्र उनके दिव्य आशीर्वाद को आमंत्रित करता है और साधक को धर्म, सत्य और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करता है।
उद्भव स्थिति संहारिणीं हरिणीं सर्वश्रेयस्करिं सीतां नतोऽहम् रामवल्लभाम्॥
यह मंत्र जीवन के समस्त दुःखों और क्लेशों को दूर करता है। नियमित जप से माँ सीता की करुणा प्राप्त होती है, जिससे मन में शांति और संतोष का संचार होता है।
श्रीराम सानिध्यवशं जगदानन्ददायिनी, उत्पत्ति स्थिति संहारकारिणी सर्वदेहिनाम्॥
इस पवित्र मंत्र का जप असाध्य रोगों से रक्षा करता है और शरीर, मन तथा आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। श्रीराम और माँ सीता के संयुक्त आशीर्वाद से आरोग्यता और जीवनशक्ति में वृद्धि होती है।
नाम पहारु दिवस निशि ध्यान तुम्हार कपाट, लोचन निज पद जंत्रित जाही प्राण कहिं बात॥
इस मंत्र के जप से साधक के चारों ओर एक दिव्य कवच बनता है जो उसे नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों से सुरक्षित रखता है। यह भय को मिटाकर आत्मविश्वास और साहस प्रदान करता है।
श्री जानकी रामाभ्यां नमः। जय श्री सीता राम। श्री सीतायै नमः॥
इस पावन जप से जीवन में सौभाग्य, शांति और समृद्धि आती है। घर में प्रेम, सामंजस्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
माँ सीता भगवान विष्णु की अर्धांगिनी और लक्ष्मीजी का अवतार मानी जाती हैं। वे राजा जनक की पुत्री होने के कारण जनकी या जनकसुता कहलाती हैं और मिथिला की राजकुमारी होने से मैथिली के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। उनका जीवन त्याग, पवित्रता और नारी-शक्ति का प्रतीक है। आज भी भगवान राम से पहले भक्त उनके नाम का स्मरण करते हैं — “सीता-राम” — जो यह दर्शाता है कि बिना सीता के राम भी अधूरे हैं।
रामायण में भगवान राम परम सत्य और चेतना के प्रतीक हैं, जबकि माता सीता उस शक्ति का स्वरूप हैं जो सृष्टि को संचालित करती है। वे मूलाधार चक्र में स्थित पृथ्वी तत्व की अधिष्ठात्री हैं। सीता मंत्र का नियमित जप कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करता है और शरीर तथा मन में संतुलन लाता है। इससे साधक के भीतर करुणा, भक्ति और आत्मबल का विकास होता है।
