जन्मकुंडली का छठा भाव - कौन सा ग्रह देगा आपको क्या रोग ?

जन्मकुंडली का छठा भाव - कौन सा ग्रह देगा आपको क्या रोग ?

जन्मकुंडली का छठा भाव - कौन सा ग्रह देगा आपको क्या रोग ?

व्यक्ति की आन्तरिक शक्ति ही वह ताकत है, जिससे वह बाहरी तनाव देने वाली स्थितियों का सामना कर सकता है। यदि उसकी आन्तरिक शक्ति बलवान नहीं होगी, तो ऐसा जातक शीघ्र ही परास्त हो जाता है जिसके कारण उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न होता है। जन्मकुण्डली का छठा भाव और छठे भाव से सम्बन्धित ग्रह, जातक की इसी आन्तरिक शक्ति की निर्बलता को, उसकी भाग्यहीनता की, सीमा को और शत्रुओं को परास्त करने की शक्ति को दर्शाते हैं।

जन्मकुण्डली का छठा भाव - नवग्रहों का फल

जन्मकुंडली का छठा भाव - सूर्य

यदि व्यक्ति की जन्मकुण्डली के छठे भाव में सूर्य हो तो जातक रोगग्रस्त होता है। यदि वृष, वृश्चिक अथवा कुम्भ राशिस्थ हो तो हृदय कष्ट अथवा दमा रोग होता है। मिथुन, कन्या अथवा मीन राशिस्थ हो तो क्षय रोग होता है। कर्क, तुला अथवा मकर राशिस्थ होतो उदर विकार होता है। शुभ ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट हो तो जातक निरोगी होता है।

छठे भाव में चन्द्रमा

शुभ चन्द्रमा से व्यक्ति निरोगी होता है। वृष राशि का हो तो कण्ठ रोग, वृश्चिक का हो तो बवासीर, मिथुन, कन्या धनु अथवा मीन राशि का हो तो कफ विकार होता है। यदि मंगल मिथुन अथवा कन्या राशि में हो अथवा कन्या राशि में हो अथवा शुभ ग्रह से दृष्ट न हो तो जातक कुष्ठ रोगी होता है।

जन्मकुंडली छठा भाव - बुध, शुक्र

जन्म कुण्डली के षष्ठ भाव में बुध जातक हाथ-पांव को रोगी, श्वास अथवा क्षय रोगी, मानसिक व्याधि युक्त होता है। छठे भाव में गुरु जातक की बलहीन बनाता है। यदि गुरु पाप ग्रह से युक्त अथवा पाप क्षेत्री हो तो रोगी अथवा शीत रोगी होता है। राहु युक्त तथा शनि की राशि पर हो तो क्षय रोग एवं भयंकर रोग की पीड़ा होती है। छठे भाव में यदि शुक्र नीचस्थ, अस्त अथवा शत्रु क्षेत्री हो तो रोग की वृद्धि होती है।

जन्मकुंडली का छठा भाव - शनि

छठे भाव में शनि सिंह अथवा वृश्चिक राशि का हो तो जातक को ह्रदय, कष्ठ एवं मूत्राशय सम्बन्धी रोग होता है। मिथुन, कन्या, धनु अथवा मीन राशि का ही तो क्षय रोग होता है। उच्चस्थ राहु-केतु निरोगी बनाते हैं तथा अशुभ अवस्था में हो तो भूत-प्रेत जन्य रोगों का रोगी होता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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