श्री बटुक भैरव अष्टोत्तरशतनामावली को प्रातः या सायंकाल, विशेषकर मंगलवार, शनिवार, भैरवाष्टमी या किसी भी शुभ तिथि पर शांत मन से पढ़ना चाहिए। इसे मंदिर में या घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाकर, भैरव जी का स्मरण करते हुए पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है। इसके पाठ से भय, बाधा, नकारात्मक ऊर्जा, अदृश्य विघ्न और असुरक्षित भाव समाप्त होते हैं। साधक को साहस, आत्मविश्वास, मानसिक शांति और त्वरित कार्यसिद्धि प्राप्त होती है। व्यवसाय में रुकावटें दूर होती हैं, नौकरी में स्थायित्व मिलता है और धन की गति सुधरती है। यह पाठ ग्रह दोष, विशेषकर राहु-केतु व शनि जनित समस्याओं को शांत करता है और जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सफलता प्रदान करता है।
ओं भैरवाय नमः ।
ओं भूतनाथाय नमः ।
ओं भूतात्मने नमः ।
ओं भूतभावनाय नमः ।
ओं क्षेत्रदाय नमः ।
ओं क्षेत्रपालाय नमः ।
ओं क्षेत्रज्ञाय नमः ।
ओं क्षत्रियाय नमः ।
ओं विराजे नमः । ९
ओं श्मशानवासिने नमः ।
ओं मांसाशिने नमः ।
ओं खर्पराशिने नमः ।
ओं मखान्तकृते नमः । [स्मरान्तकाय]
ओं रक्तपाय नमः ।
ओं प्राणपाय नमः ।
ओं सिद्धाय नमः ।
ओं सिद्धिदाय नमः ।
ओं सिद्धसेविताय नमः । १८
ओं करालाय नमः ।
ओं कालशमनाय नमः ।
ओं कलाकाष्ठातनवे नमः ।
ओं कवये नमः ।
ओं त्रिनेत्राय नमः ।
ओं बहुनेत्राय नमः ।
ओं पिङ्गललोचनाय नमः ।
ओं शूलपाणये नमः ।
ओं खड्गपाणये नमः । २७
ओं कङ्कालिने नमः ।
ओं धूम्रलोचनाय नमः ।
ओं अभीरवे नमः ।
ओं भैरवाय नमः ।
ओं भैरवीपतये नमः । [भीरवे]
ओं भूतपाय नमः ।
ओं योगिनीपतये नमः ।
ओं धनदाय नमः ।
ओं धनहारिणे नमः । ३६
ओं धनपाय नमः ।
ओं प्रतिभाववते नमः । [प्रीतिवर्धनाय]
ओं नागहाराय नमः ।
ओं नागकेशाय नमः ।
ओं व्योमकेशाय नमः ।
ओं कपालभृते नमः ।
ओं कालाय नमः ।
ओं कपालमालिने नमः ।
ओं कमनीयाय नमः । ४५
ओं कलानिधये नमः ।
ओं त्रिलोचनाय नमः ।
ओं ज्वलन्नेत्राय नमः ।
ओं त्रिशिखिने नमः ।
ओं त्रिलोकभृते नमः ।
ओं त्रिवृत्तनयनाय नमः ।
ओं डिम्भाय नमः
ओं शान्ताय नमः ।
ओं शान्तजनप्रियाय नमः । ५४
ओं वटुकाय नमः ।
ओं वटुकेशाय नमः ।
ओं खट्वाङ्गवरधारकाय नमः ।
ओं भूताध्यक्षाय नमः ।
ओं पशुपतये नमः ।
ओं भिक्षुकाय नमः ।
ओं परिचारकाय नमः ।
ओं धूर्ताय नमः ।
ओं दिगम्बराय नमः । ६३
ओं सौरिणे नमः । [शूराय]
ओं हरिणे नमः ।
ओं पाण्डुलोचनाय नमः ।
ओं प्रशान्ताय नमः ।
ओं शान्तिदाय नमः ।
ओं शुद्धाय नमः ।
ओं शङ्करप्रियबान्धवाय नमः ।
ओं अष्टमूर्तये नमः ।
ओं निधीशाय नमः । ७२
ओं ज्ञानचक्षुषे नमः ।
ओं तमोमयाय नमः ।
ओं अष्टाधाराय नमः ।
ओं कलाधाराय नमः । [षडाधाराय]
ओं सर्पयुक्ताय नमः ।
ओं शशीशिखाय नमः । [शिखीसखाय]
ओं भूधराय नमः ।
ओं भूधराधीशाय नमः ।
ओं भूपतये नमः । ८१
ओं भूधरात्मकाय नमः ।
ओं कङ्कालधारिणे नमः ।
ओं मुण्डिने नमः ।
ओं व्यालयज्ञोपवीतवते नमः । [नाग]
ओं जृम्भणाय नमः ।
ओं मोहनाय नमः ।
ओं स्तम्भिने नमः ।
ओं मारणाय नमः ।
ओं क्षोभणाय नमः । ९०
ओं शुद्धनीलाञ्जनप्रख्यदेहाय नमः ।
ओं मुण्डविभूषिताय नमः ।
ओं बलिभुजे नमः ।
ओं बलिभुतात्मने नमः ।
ओं कामिने नमः । [बालाय]
ओं कामपराक्रमाय नमः । [बाल]
ओं सर्वापत्तारकाय नमः ।
ओं दुर्गाय नमः ।
ओं दुष्टभूतनिषेविताय नमः । ९९
ओं कामिने नमः ।
ओं कलानिधये नमः ।
ओं कान्ताय नमः ।
ओं कामिनीवशकृते नमः ।
ओं वशिने नमः ।
ओं सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।
ओं वैद्याय नमः ।
ओं प्रभविष्णवे नमः ।
ओं प्रभाववते नमः । १०८
इति श्री बटुकभैरवाष्टोत्तरशतनामावली ।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।