श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली

श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली

 

 

श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने से देवी भद्रकाली के 108 दिव्य नामों का स्मरण होता है, जो साधक को नकारात्मक शक्तियों, भय, अशांति, बाधाओं, ग्रहदोषों और अदृश्य संकटों से संरक्षण प्रदान करता है। यह पाठ मानसिक शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और स्थिरता बढ़ाता है तथा चिंता, तनाव और मन के भ्रम को दूर करता है। देवी की कृपा से जीवन में समृद्धि, सफलता और घर-परिवार में शांति बढ़ती है। इसे स्नान के बाद प्रातः या संध्या के समय, विशेष रूप से मंगलवार, शुक्रवार, रविवार, नवरात्रि और अमावस्या पर या जब भी शक्ति, संरक्षण या मानसिक शांति की आवश्यकता हो, तब पढ़ना चाहिए। नियमित श्रद्धा से किया गया पाठ साधक के चारों ओर दिव्य संरक्षण कवच बनाता है और शीघ्र फल देता है।

 

 

 

 

ओं भद्रकाल्यै नमः ।
ओं कामरूपायै नमः ।
ओं महाविद्यायै नमः ।
ओं यशस्विन्यै नमः ।
ओं महाश्रयायै नमः ।
ओं महाभागायै नमः ।
ओं दक्षयागविभेदिन्यै नमः ।
ओं रुद्रकोपसमुद्भूतायै नमः ।
ओं भद्रायै नमः । ९

ओं मुद्रायै नमः ।
ओं शिवङ्कर्यै नमः ।
ओं चन्द्रिकायै नमः ।
ओं चन्द्रवदनायै नमः ।
ओं रोषताम्राक्षशोभिन्यै नमः ।
ओं इन्द्रादिदमन्यै नमः ।
ओं शान्तायै नमः ।
ओं चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः ।
ओं भक्तार्तिहारिण्यै नमः । १८

ओं मुक्तायै नमः ।
ओं चण्डिकानन्ददायिन्यै नमः ।
ओं सौदामिन्यै नमः ।
ओं सुधामूर्त्यै नमः ।
ओं दिव्यालङ्कारभूषितायै नमः ।
ओं सुवासिन्यै नमः ।
ओं सुनासायै नमः ।
ओं त्रिकालज्ञायै नमः ।
ओं धुरन्धरायै नमः । २७

ओं सर्वज्ञायै नमः ।
ओं सर्वलोकेश्यै नमः ।
ओं देवयोनये नमः ।
ओं अयोनिजायै नमः ।
ओं निर्गुणायै नमः ।
ओं निरहङ्कारायै नमः ।
ओं लोककल्याणकारिण्यै नमः ।
ओं सर्वलोकप्रियायै नमः ।
ओं गौर्यै नमः । ३६

ओं सर्वगर्वविमर्दिन्यै नमः ।
ओं तेजोवत्यै नमः ।
ओं महामात्रे नमः ।
ओं कोटिसूर्यसमप्रभायै नमः ।
ओं वीरभद्रकृतानन्दभोगिन्यै नमः ।
ओं वीरसेवितायै नमः ।
ओं नारदादिमुनिस्तुत्यायै नमः ।
ओं नित्यायै नमः ।
ओं सत्यायै नमः । ४५

ओं तपस्विन्यै नमः ।
ओं ज्ञानरूपायै नमः ।
ओं कलातीतायै नमः ।
ओं भक्ताभीष्टफलप्रदायै नमः ।
ओं कैलासनिलयायै नमः ।
ओं शुभ्रायै नमः ।
ओं क्षमायै नमः ।
ओं श्रियै नमः ।
ओं सर्वमङ्गलायै नमः । ५४

ओं सिद्धविद्यायै नमः ।
ओं महाशक्त्यै नमः ।
ओं कामिन्यै नमः ।
ओं पद्मलोचनायै नमः ।
ओं देवप्रियायै नमः ।
ओं दैत्यहन्त्र्यै नमः ।
ओं दक्षगर्वापहारिण्यै नमः ।
ओं शिवशासनकर्त्र्यै नमः ।
ओं शैवानन्दविधायिन्यै नमः । ६३

ओं भवपाशनिहन्त्र्यै नमः ।
ओं सवनाङ्गसुकारिण्यै नमः ।
ओं लम्बोदर्यै नमः ।
ओं महाकाल्यै नमः ।
ओं भीषणास्यायै नमः ।
ओं सुरेश्वर्यै नमः ।
ओं महानिद्रायै नमः ।
ओं योगनिद्रायै नमः ।
ओं प्रज्ञायै नमः । ७२

ओं वार्तायै नमः ।
ओं क्रियावत्यै नमः ।
ओं पुत्रपौत्रप्रदायै नमः ।
ओं साध्व्यै नमः ।
ओं सेनायुद्धसुकाङ्क्षिण्यै नमः ।
ओं शम्भवे इच्छायै नमः ।
ओं कृपासिन्धवे नमः ।
ओं चण्ड्यै नमः ।
ओं चण्डपराक्रमायै नमः । ८१

ओं शोभायै नमः ।
ओं भगवत्यै नमः ।
ओं मायायै नमः ।
ओं दुर्गायै नमः ।
ओं नीलायै नमः ।
ओं मनोगत्यै नमः ।
ओं खेचर्यै नमः ।
ओं खड्गिन्यै नमः ।
ओं चक्रहस्तायै नमः । ९०

ओं शूलविधारिण्यै नमः ।
ओं सुबाणायै नमः ।
ओं शक्तिहस्तायै नमः ।
ओं पादसञ्चारिण्यै नमः ।
ओं परायै नमः ।
ओं तपःसिद्धिप्रदायै नमः ।
ओं देव्यै नमः ।
ओं वीरभद्रसहायिन्यै नमः ।
ओं धनधान्यकर्यै नमः । ९९

ओं विश्वायै नमः ।
ओं मनोमालिन्यहारिण्यै नमः ।
ओं सुनक्षत्रोद्भवकर्यै नमः ।
ओं वंशवृद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ओं ब्रह्मादिसुरसंसेव्यायै नमः ।
ओं शाङ्कर्यै नमः ।
ओं प्रियभाषिण्यै नमः ।
ओं भूतप्रेतपिशाचादिहारिण्यै नमः ।
ओं सुमनस्विन्यै नमः । १०८

ओं पुण्यक्षेत्रकृतावासायै नमः ।
ओं प्रत्यक्षपरमेश्वर्यै नमः । १११

इति श्री भद्रकाली अष्टोत्तरशतनामावली ।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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