श्री गणेश स्तोत्रम् (अग्नि कृतम्)

श्री गणेश स्तोत्रम् (अग्नि कृतम्)

अग्निरुवाच ।
नमस्ते विघ्ननाशाय भक्तानां हितकारक ।
नमस्ते विघ्नकर्त्रे वै ह्यभक्तानां विनायक ॥ १ ॥

नमो मूषकवाहाय गजवक्त्राय धीमते ।
आदिमध्यान्तहीनायादिमध्यान्तस्वरूपिणे ॥ २ ॥

चतुर्भुजधरायैव चतुर्वर्गप्रदायिने ।
एकदन्ताय वै तुभ्यं हेरम्बाय नमो नमः ॥ ३ ॥

लम्बोदराय देवाय गजकर्णाय ढुण्ढये ।
योगशान्तिस्वरूपाय योगशान्तिप्रदायिने ॥ ४ ॥

योगिभ्यो योगदात्रे च योगिनां पतये नमः ।
चराचरमयायैव प्रणवाकृतिधारिणे ॥ ५ ॥

सिद्धिबुद्धिमयायैव सिद्धिबुद्धिप्रदायक ।
सिद्धिबुद्धिपते तुभ्यं नमो भक्तप्रियाय च ॥ ६ ॥

अनन्तानन देवेश प्रसीद करुणानिधे ।
दासोऽहं ते गणाध्यक्ष मां पालय विशेषतः ॥ ७ ॥

धन्योऽहं सर्वदेवेषु दृष्ट्वा पादं विनायक ।
कृतकृत्यो महायोगी ब्रह्मभूतो न संशयः ॥ ८ ॥

यदि प्रसन्नभावेन वरदोऽसि गजानन ।
तदा मां शापहीनं त्वं कुरु देवेन्द्रसत्तम ॥ ९ ॥

तव भक्तिं दृढां देहि यया मोहो विनश्यति ।
तव भक्तैः सहावासो ममास्तु गणनायक ॥ १० ॥

यदा सङ्कटसम्युक्तस्तदा स्मरणतस्तव ।
निस्सङ्कटोऽहमत्यन्तं भवामि त्वत्प्रसादतः ॥ ११ ॥

इति श्रीमन्मुद्गले महापुराणे द्वितीयखण्डे अग्नि कृत श्री गणेश स्तोत्रम् ॥


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