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मंत्र
गोवर्धन मंत्र भगवान श्रीकृष्ण और पवित्र गोवर्धन पर्वत को समर्पित एक अत्यंत शुभ मंत्र है। यह मंत्र ईश्वरीय संरक्षण, संतुलन और समर्पण का प्रतीक है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका जप करने से व्यक्ति को वह दिव्य संदेश प्राप्त होता है जो श्रीकृष्ण ने हमें दिया – नम्रता, कृतज्ञता और प्रकृति के साथ सामंजस्य से जीवन जीना।
गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। यह पर्व उस दिव्य घटना की स्मृति में मनाया जाता है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने नन्हें करांगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह घटना ईश्वरीय संरक्षण, अहंकार पर आस्था की विजय और मानवता व प्रकृति की एकता का प्रतीक है।
इस पूजा का सार यह है कि हमें अपने अहंकार का त्याग करना चाहिए और प्रकृति एवं समस्त जीवों के प्रति कृतज्ञता रखनी चाहिए। गोवर्धन पर्वत की पूजा जीवनदायी शक्तियों और सृष्टि के प्रति आदर प्रकट करती है तथा मनुष्य, प्रकृति और परमात्मा के शाश्वत संबंध को दर्शाती है।
।। गोवर्धन धाराधार गोकुल त्राणकारक ।
विष्णुबाहुः कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव ।।
लिप्यांतरण:
Govardhan Dharadhar Gokul Tranakaarak।
Vishnubahuh Kritochchhraay Gavaan Kotiprabho Bhav।।
भावार्थ: यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करता है जिन्होंने गोकुलवासियों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत को अपनी भुजा पर धारण किया। यह हमें कठिन परिस्थितियों में दृढ़ आस्था और ईश्वरीय शरण की महत्ता का स्मरण कराता है।
।। श्रीकृष्णाय वयं नमः सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे ।
तापत्रय विनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नमः ।।
लिप्यांतरण:
Shri Krishnaya Vayam Namah Sachchidananda Rupaya Vishwotpatyadi Hetave।
Taapatraya Vinashay Shri Krishnaya Vayam Namah।।
भावार्थ: हम उन श्रीकृष्ण को नमन करते हैं जो सत्य, चैतन्य और आनंद के स्वरूप हैं। वे सृष्टि के कारण हैं और सभी दुखों का नाश करने वाले हैं। इस मंत्र के जप से ईश्वरीय कृपा, मानसिक शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
।। ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ।।
लिप्यांतरण:
Om Devakinandanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi Tanno Krishna: Prachodayat।।
भावार्थ: हम देवकीनंदन, वासुदेवपुत्र श्रीकृष्ण का ध्यान करते हैं। वे हमारे मन को प्रकाशमान करें, हमें सच्चे ज्ञान और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करें।
गोवर्धन मंत्र केवल एक प्रार्थना नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और संरक्षण का अनुभव कराने वाला साधन है। जब इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपा जाता है, तब यह आत्मा को नम्रता, भक्ति और प्रकृति के दिव्य स्वरूप से जोड़ देता है। गोवर्धन पूजा या किसी भी शुभ अवसर पर इस मंत्र का जप करने से श्रीकृष्ण की अनंत कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शांति, समृद्धि तथा आध्यात्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।
