श्री गोवर्धनाष्टकम्

श्री गोवर्धनाष्टकम्

गुणातीतं परम्ब्रह्म व्यापकं भूधरेश्वरम् ।
गोकुलानन्ददातारं वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ १ ॥

गोलोकाधिपतिं कृष्ण विग्रहं परमेश्वरम् ।
चतुष्पदार्थदं नित्यं वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ २ ॥

नानाजन्मकृतं पापं दहेत् तूलं हुताशनः ।
कृष्णभक्तिप्रदं शश्वद्वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ३ ॥

सदानन्दं सदावन्द्यं सदा सर्वार्थसाधनम् ।
साक्षिणं सकलाधारं वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ४ ॥

सुरूपं स्वस्तिकासीनं सुनासाग्रं कृतेक्षणम् ।
ध्यायन्तं कृष्ण कृष्णेति वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ५ ॥

विश्वरूपं प्रजाधीशं वल्लवीवल्लभप्रियम् ।
विह्वलप्रियमात्मानं वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ६ ॥

आनन्दकृत्सुराशीशकृतसम्भारभोजनम् ।
महेन्द्रमदहन्तारं वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ७ ॥

कृष्णलीलारसाविष्टं कृष्णात्मानं कृपाकरम् ।
कृष्णानन्दप्रदं साक्षाद्वन्दे गोवर्धनं गिरिम् ॥ ८ ॥

गोवर्धनाष्टकमिदं यः पठेद्भक्तिसम्युतः ।
तन्नेत्रगोचरो याति कृष्णो गोवर्धनेश्वरः ॥ ९ ॥

इदं श्रीमद्घनश्यामनन्दनस्य महात्मनः ।
ज्ञानिनो ज्ञानिरामस्य कृतिर्विजयतेतराम् ॥ १० ॥

इति श्री गोवर्धनाष्टकम् ॥


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