श्री हरिहर अष्टोत्तर शतनामावली

श्री हरिहर अष्टोत्तर शतनामावली

पाठ के लाभ:
श्री हरिहर अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने से जीवन में भय, चिंता और मानसिक अशांति दूर होती है। यह स्तोत्र स्वास्थ्य, धन, दीर्घायु, आध्यात्मिक उन्नति और कार्यसिद्धि प्रदान करता है। परिवार में सौहार्द बढ़ता है, व्यवसाय और नौकरी में स्थायित्व आता है, और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। ग्रहदोष—विशेषकर शनि, राहु, केतु और चंद्र—शांत होते हैं और जीवन में सुरक्षा, सफलता और मानसिक शांति आती है।

पाठ करने का समय और विधि:
इस नामावली का पाठ आप प्रातः या सायंकाल, विशेषकर सोमवार, बुधवार, प्रदोष या किसी भी शुभ तिथि पर कर सकते हैं। इसे हरिहर या शिव–विष्णु प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर, जल या दूध अर्पित करते हुए और मन को शांत रखकर पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है। नियमित पाठ से भक्त पर भगवान हरिहर की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है और जीवन में समग्र उन्नति होती है।







श्री हरिहर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् >>

ओं गोविन्दाय नमः ।
ओं माधवाय नमः ।
ओं मुकुन्दाय नमः ।
ओं हरये नमः ।
ओं मुरारये नमः ।
ओं शम्भवे नमः ।
ओं शिवाय नमः ।
ओं ईशाय नमः ।
ओं शशिशेखराय नमः । ९

ओं शूलपाणये नमः ।
ओं दामोदराय नमः ।
ओं अच्युताय नमः ।
ओं जनार्दनाय नमः ।
ओं वासुदेवाय नमः ।
ओं गङ्गाधराय नमः ।
ओं अन्धकरिपवे नमः ।
ओं हराय नमः ।
ओं नीलकण्ठाय नमः । १८

ओं वैकुण्ठाय नमः ।
ओं कैटभरिपवे नमः ।
ओं कमठाय नमः ।
ओं अब्जपाणये नमः ।
ओं भूतेशाय नमः ।
ओं खण्डपरशवे नमः ।
ओं मृडाय नमः ।
ओं चण्डिकेशाय नमः ।
ओं विष्णवे नमः । २७

ओं नृसिंहाय नमः ।
ओं मधुसूदनाय नमः ।
ओं चक्रपाणये नमः ।
ओं गौरीपतये नमः ।
ओं गिरिशाय नमः ।
ओं शङ्कराय नमः ।
ओं चन्द्रचूडाय नमः ।
ओं नारायणाय नमः ।
ओं असुरनिबर्हणाय नमः । ३६

ओं शार्ङ्गपाणये नमः ।
ओं मृत्युञ्जयाय नमः ।
ओं उग्राय नमः ।
ओं विषमेक्षणाय नमः ।
ओं कामशत्रवे नमः ।
ओं श्रीकान्ताय नमः ।
ओं पीतवसनाय नमः ।
ओं अम्बुदनीलाय नमः ।
ओं शौरये नमः । ४५

ओं ईशानाय नमः ।
ओं कृत्तिवसनाय नमः ।
ओं त्रिदशैकनाथाय नमः ।
ओं लक्ष्मीपतये नमः ।
ओं मधुरिपवे नमः ।
ओं पुरुषोत्तमाय नमः ।
ओं आद्याय नमः ।
ओं श्रीकण्ठाय नमः ।
ओं दिग्वसनाय नमः । ५४

ओं शान्ताय नमः ।
ओं पिनाकपाणये नमः ।
ओं आनन्दकन्दाय नमः ।
ओं धरणीधराय नमः ।
ओं पद्मनाभाय नमः ।
ओं सर्वेश्वराय नमः ।
ओं त्रिपुरसूदनाय नमः ।
ओं देवदेवाय नमः ।
ओं ब्रह्मण्यदेवाय नमः । ६३

ओं गरुडध्वजाय नमः ।
ओं शङ्खपाणये नमः ।
ओं त्र्यक्षाय नमः ।
ओं उरगाभरणाय नमः ।
ओं बालमृगाङ्कमौलिने नमः ।
ओं श्रीरामाय नमः ।
ओं राघवाय नमः ।
ओं रमेश्वराय नमः ।
ओं रावणारये नमः । ७२

ओं भूतेशाय नमः ।
ओं मन्मथरिपवे नमः ।
ओं प्रमथाधिनाथाय नमः ।
ओं चाणूरमर्दनाय नमः ।
ओं हृषीकपतये नमः ।
ओं मुरारये नमः ।
ओं शूलिने नमः ।
ओं गिरीशाय नमः ।
ओं रजनीशकलावतंसाय नमः । ८१

ओं कंसप्रणाशनाय नमः ।
ओं सनातनाय नमः ।
ओं केशिनाशाय नमः ।
ओं भर्गाय नमः ।
ओं त्रिनेत्राय नमः ।
ओं भवाय नमः ।
ओं भूतपतये नमः ।
ओं पुरारये नमः ।
ओं गोपीपतये नमः । ९०

ओं यदुपतये नमः ।
ओं वसुदेवसूनवे नमः ।
ओं कर्पूरगौराय नमः ।
ओं वृषभध्वजाय नमः ।
ओं फालनेत्राय नमः ।
ओं गोवर्धनोद्धरणाय नमः ।
ओं धर्मधुरीणाय नमः ।
ओं गोपाय नमः ।
ओं स्थाणवे नमः । ९९

ओं त्रिलोचनाय नमः ।
ओं पिनाकधराय नमः ।
ओं स्मरारये नमः ।
ओं कृष्णाय नमः ।
ओं अनिरुद्धाय नमः ।
ओं कमलाकराय नमः ।
ओं कल्मषारये नमः ।
ओं विश्वेश्वराय नमः ।
ओं त्रिपथगार्द्रजटाकलापायै नमः । १०८


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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