श्री काली प्रातः स्मरण स्तोत्रम्

श्री काली प्रातः स्मरण स्तोत्रम्

प्रातः स्मरामि मदिरारुणपूर्णनेत्रां
कालीं करालवदनां कमनीयमात्राम् ।
उद्यन्नितानतगतां विगतां स्वसंस्थान्
धात्रीं समस्त जगतां करुणार्द्रचित्ताम् ॥ १ ॥

प्रातर्भजामि भुजगाभरणामपर्णां
श्रीदक्षिणां ललितवाललतां सपर्णाम् ।
कारुण्यपूर्णनयनां नगराजकन्यां
धन्यां वराऽभयकरां परमार्तिहन्त्रीम् ॥ २ ॥

प्रातर्नमामि नगराजकुलोद्भवां तां
कान्तां शिवस्य करवालकपालहस्ताम् ।
त्रैलोक्यपालनपरां प्रणवादिमात्रां
नागेन्द्रहारकलितां ललितां त्रिनेत्राम् ॥ ३ ॥

श्लोकत्रयमिमं पुण्यं प्रातः प्रातः पठेन्नरः ।
तमोबुद्धिं समुत्तीर्य सपश्येत् कालिकापदम् ॥ ४ ॥

इति श्री काली प्रातः स्मरण स्तोत्रम् ।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

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