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मंत्र
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
अर्थ: हम भगवान श्रीकृष्ण, जो देवकी और वासुदेव के पुत्र हैं, उनका ध्यान करते हैं। वे हमारे बुद्धि को सत्य और दिव्यता की ओर प्रेरित करें।
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे | हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।
अर्थ: मैं भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम को नमन करता हूँ, जो विष्णु के अवतार हैं और जिनके नाम के जप से मन और हृदय शुद्ध होते हैं।
ॐ श्रीकृष्णः शरणं मम।
अर्थ: हे भगवान श्रीकृष्ण! मुझे अपनी शरण में ले लीजिए। मैं सम्पूर्ण रूप से आपके चरणों में समर्पित हूँ।
ॐ राधे कृष्णाय नमः।
अर्थ: राधा-कृष्ण को प्रणाम, जो प्रेम और भक्ति के शाश्वत स्वरूप हैं।
ॐ नमः शिवाय वासुदेवाय।
अर्थ: मैं वासुदेव (कृष्ण) को प्रणाम करता हूँ, जो शिव के समान परम चैतन्य स्वरूप हैं।
ॐ गोविन्दाय नमः।
अर्थ: भगवान गोविन्द को प्रणाम, जो समस्त प्राणियों के रक्षक और दुखों के हरने वाले हैं।
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने | प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः।
अर्थ: बार-बार भगवान श्रीकृष्ण, वासुदेव, गोविन्द और परमात्मा को प्रणाम, जो समस्त दुखों और कष्टों का नाश करने वाले हैं।
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।
अर्थ: हे आकर्षण के स्रोत भगवान कृष्ण! मुझे प्रेम, शांति और सफलता प्रदान करें।
ॐ कृष्णाय नमः।
अर्थ: मैं भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार करता हूँ, जो आनंद और करुणा के साक्षात स्वरूप हैं।
ॐ गोवल्लभाय स्वाहा।
अर्थ: हे गोविन्द, गोपों के प्रिय, मेरी भक्ति और प्रार्थना स्वीकार करें।
श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं, जो ब्रह्मांड के रक्षक और पालनकर्ता हैं। उनका जन्म मथुरा में द्वापर युग में हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा और ज्ञान से भरा हुआ था। वे लीला पुरुषोत्तम के रूप में पूज्य हैं, जिन्होंने मानवता के कल्याण हेतु दिव्य लीलाएँ कीं।
श्रीकृष्ण कई नामों से जाने जाते हैं – कन्हैया, गोपाल, श्याम, द्वारकाधीश, और वासुदेव। उन्होंने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश देकर मानवता को धर्म, भक्ति और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वे सच्चे मार्गदर्शक, दार्शनिक और करुणामय मित्र हैं।
कृष्ण मंत्र का जप मन, आत्मा और वातावरण को शुद्ध करता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप जीवन से नकारात्मकता और भय को दूर करता है और ईश्वर से जुड़ाव को बढ़ाता है। यह मंत्र शांति, प्रेम, और भक्ति को जागृत करता है तथा आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
भगवान श्रीकृष्ण का नाम स्वयं अमृत के समान है। उनके मंत्रों का नियमित जप जीवन में शांति, समृद्धि और आनंद लाता है। श्रद्धा और विश्वास से किया गया कृष्ण जप मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करता है और भक्त को भगवान के दिव्य सान्निध्य का अनुभव कराता है।
