श्री कृष्ण शरणाष्टकम् २

श्री कृष्ण शरणाष्टकम् २

स्वामिनीचिन्तया चित्तखेदखिन्न मुखाम्बुजः ।
निमीलन्नेत्रयुगलः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ १ ॥

मनोजभावभरितो भावयन्मनसा रतिम् ।
मीलनव्याकुलमनाः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ २ ॥

निश्श्वासशुष्यद्वदनो मधुराधरपल्लवः ।
मुरलीनादनिरतः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ३ ॥

निकुञ्जमन्दिरान्तस्थ-स्सुमपल्लवतल्पकृत् ।
प्रतीक्षमाणस्स्वप्राप्तिं श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ४ ॥

वियोगभावविहस-द्वदनाम्बुजसुन्दरः ।
आकर्णयन्नलिरुतं श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ५ ॥

मुञ्चन्नश्रूणि विलुठन् गायन्मत्त इव क्वचित् ।
नृत्यन् रसासक्तमनाः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ६ ॥

शयान एकतस्तल्पे स्वप्नसम्बन्धसिद्धये ।
प्रबोधपश्चात्तप्तो यः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ७ ॥

रसात्मरसरीतिज्ञो रसलीलापरायणः ।
रसात्मगोपीरसिकः श्रीकृष्णश्शरणं मम ॥ ८ ॥

इति श्रीहतिरायाचार्यविरचितं श्रीकृष्णशरणाष्टकम् ।


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