श्री कुब्जिका वर्णन स्तोत्रम्

श्री कुब्जिका वर्णन स्तोत्रम्

नीलोत्पलदलश्यामा षड्वक्त्रा षट्प्रकाशका ।
चिच्छक्तिरष्टादशाख्या बाहुद्वादशसम्युता ॥ १ ॥

सिंहासनसुखासीना प्रेतपद्मोपरिस्थिता ।
कुलकोटिसहस्राख्या कर्कोटो मेखलास्थितः ॥ २ ॥

तक्षकेणोपरिष्टाच्च गले हारश्च वासुकिः ।
कुलिकः कर्णयोर्यस्याः कूर्मः कुण्डलमण्डलः ॥ ३ ॥

भ्रुवोः पद्मो महापद्मो वामे नागः कपालकः ।
अक्षसूत्रं च खट्वाङ्गं शङ्खं पुस्तं च दक्षिणे ॥ ४ ॥

त्रिशूलं दर्पणं खड्गं रत्नमालाङ्कुशं धनुः ।
श्वेतमूर्धं मुखं देव्या ऊर्ध्वश्वेतं तथाम् ॥ ५ ॥

पूर्वास्यं पाण्डुरं क्रोधि दक्षिणं कृष्णवर्णकम् ।
हिमकुन्देन्दुभं सौम्यं ब्रह्मा पादतले स्थितः ॥ ६ ॥

विष्णुस्तु जघने रुद्रो हृदि कण्ठे तथेश्वरः ।
सदाशिवो ललाटे स्याच्छिवस्तस्योर्ध्वतः स्थितः ।
आघूर्णिता कुब्जिकैवं ध्येया पूजादिकर्मसु ॥ ७ ॥

इत्याग्नेये महापुराणे कुब्जिकापूजाकथनं नाम चतुश्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याये कुब्जिका वर्णन स्तोत्रम् ।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

कैटेगरी

आपके लिए रिपोर्ट्स

    अनुशंसित पूजा

      Ask Question

      आपके लिए खरीदारी

      आपके लिए रिपोर्ट्स

      त्रिलोक ऐप में आपका स्वागत है!

      image