महालक्ष्मी चालीसा

महालक्ष्मी चालीसा

पवित्र महालक्ष्मी चालीसा का नियमित जाप करें और अपने जीवन में धन, सफलता तथा असीम सुख को आमंत्रित करें। देवी महालक्ष्मी की कृपा से जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है। इस चालीसा का पाठ करने से आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं, स्थिरता आती है और जीवन में दिव्य समृद्धि का प्रवाह होता है।

महालक्ष्मी चालीसा के बोल

क्या आप अपने जीवन में धन, समृद्धि और अनंत सुख की प्राप्ति चाहते हैं? प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार, महालक्ष्मी देवी ही धन, सौंदर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी कृपा से घर-आंगन में आनंद, सुख और संपन्नता का वास होता है। श्री महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से शुक्र ग्रह (Shukra Graha) मजबूत होता है, जिससे जीवन में वैभव, ऐश्वर्य, वाहन और सफलता की प्राप्ति होती है। इस चालीसा का नियमित पाठ दरिद्रता, दुःख और विघ्नों को दूर कर आपके जीवन में दिव्य प्रकाश और धन का संचार करता है।

महालक्ष्मी चालीसा दोहा

जय जय श्री महालक्ष्मी, करुण मात तव ध्यान।
सिद्ध काज मम कीजिए, निज शिशु सेवक जान॥

हे माँ महालक्ष्मी! मैं आपके करुणामय स्वरूप का ध्यान करता हूँ। मुझे अपना बालक समझकर मेरे सभी शुभ कार्य सिद्ध करिए।

महालक्ष्मी चालीसा चौपाई

नमो महालक्ष्मी जय माता। तेरो नाम जगत विख्याता॥
हे माँ महालक्ष्मी! आपको कोटि-कोटि नमन, आपका नाम पूरे जगत में प्रसिद्ध है।

आदि शक्ति हो मात भवानी। पूजत सब नर मुनि ज्ञानी॥
आप ही आदि शक्ति हैं, जिन्हें हर ज्ञानी पुरुष, ऋषि और मुनि सदा पूजते हैं।

जगत पालनी सब सुख करनी। निज जनहित भंडारण भरनी॥
आप सृष्टि की पालनहार हैं, अपने भक्तों के लिए सुख और संपत्ति का भंडार भरने वाली हैं।

श्वेत कमल दल पर तव आसन। मात सुषोभित है पद्मासन॥
आप श्वेत कमल के आसन पर विराजमान हैं, आपका रूप दिव्य और मनोहर है।

श्वेताम्बर अरु श्वेत भूषण। श्वेतहि श्वेत सु सज्जित पुष्पन॥
आप श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं, श्वेत आभूषणों और श्वेत पुष्पों से सुसज्जित हैं।

शीश छत्र अति रूप विशाल। गल सोहे मुक्तन की माल॥
आपके मस्तक पर छत्र शोभित है और गले में मोतियों की माला अत्यंत मनोहर लगती है।

सुंदर सोहे कुंचित केशा। विमल नयन अरु अनुपम भेषा॥
आपके केश घुंघराले और सुंदर हैं, आपके नेत्र निर्मल और आपका भव्य रूप अनुपम है।

कमलनाल सम भुज तव चारी। सुरनर मुनिजन हित सुखकारी॥
आपके चारों भुजाएँ कमल की डंडी के समान हैं, जो देवता और मुनियों को सुख देने वाली हैं।

अद्भुत छटा मात तव बानी। सकल विश्व कियों सुखखानी॥
आपकी वाणी और आभा से संपूर्ण ब्रह्मांड में आनंद और शांति व्याप्त है।

महालक्ष्मी धन्य हो माई। पंच तत्व में सृष्टि रचाई॥
हे माँ! आप धन्य हैं, आपने पंचतत्वों से इस संपूर्ण सृष्टि की रचना की है।

जीव चराचर तुम उपजाए। पशु पक्षी नर नारी बनाए॥
सभी जीव-जंतु, पशु, पक्षी और मनुष्य आपकी ही शक्ति से उत्पन्न हुए हैं।

क्षितितल अगणित वृक्ष जमाए। अमित रंग फल फूल सुहाए॥
आपकी कृपा से पृथ्वी पर अनगिनत वृक्ष, फल और पुष्पों की सृष्टि हुई है।

सुरपति अउ नरपति सब ध्यावैं। तेरै सम्मुख शीश नवावैं॥
देवता और राजा सब आपका ध्यान करते हैं और आपके चरणों में शीश झुकाते हैं।

चारों वेदन तब यश गाया। महिमा अगम पार नहीं पाया॥
चारों वेदों ने आपकी महिमा का गान किया, परंतु आपकी महिमा की सीमा कोई नहीं जान सका।

पल में राजाही रंक बनाओ। रंक राव कर बिमल न लाओ॥
आप क्षणभर में राजा को भिखारी बना सकती हैं और भिखारी को राजा बना सकती हैं।

जो ध्यावै से बहु सुख पावै। विमुख रहै सो दुःख उठावै॥
जो आपका ध्यान करता है उसे असीम सुख मिलता है, और जो विमुख होता है वह दुःख पाता है।

ॐ श्री-श्री जय सुख की खानी। ऋद्धि सिद्धि देउ मात जन जनी॥
जय हो माँ! आप सुख की खान हैं, अपने भक्तों को ऋद्धि-सिद्धि और सुख प्रदान करें।

ॐ ह्रीं-ॐ ह्रीं सब व्याधि हटाओ। जन उन विमल दृष्टि दरसाओ॥
हे माँ! सभी रोगों को नष्ट करो और भक्तों को अपनी पवित्र झलक दिखाओ।

ॐ क्लीं-ॐ क्लीं शत्रुन क्षय कीजै। जनहित मात अभय वर दीजै॥
हे माँ! शत्रुओं का नाश करें और अपने भक्तों को निर्भयता का वरदान दें।

ऋणी दुखी जो तुमको ध्यावे। सो प्राणी सुख संपत्ति पावे॥
जो दुखी या ऋणी होकर आपका ध्यान करता है, उसे सुख और संपत्ति दोनों प्राप्त होते हैं।

रोग ग्रसित जो ध्यावे कोई। ता की निर्मल काया होई॥
जो रोगी आपका नाम जपे, वह शीघ्र ही स्वस्थ और प्रसन्न हो जाता है।

त्राहि त्राहि शरणागत तेरी। करहु मात अब नेक न देरी॥
हे करुणामयी माँ! मैं आपकी शरण में हूँ, मेरी रक्षा शीघ्र कीजिए।

बिनवौं बार-बार कर जोरी। पूर्ण आशा करहु अब मोरी॥
मैं बार-बार हाथ जोड़कर विनती करता हूँ, हे माँ! अब मेरी मनोकामना पूर्ण करें।

महालक्ष्मी चालीसा दोहा

महालक्ष्मी चालीसा, पढ़ै सुनै चित लाय।
ता ही पदार्थ मिलै, अब कहै वेद अस गाय॥

जो भक्त मन लगाकर महालक्ष्मी चालीसा का पाठ या श्रवण करता है, उसे सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है। वेदों ने भी इस सत्य का प्रतिपादन किया है।

माँ महालक्ष्मी की दिव्य कृपा से सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और आनंद का वास हो।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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