श्री मनसा देवी द्वादशनाम स्तोत्रम् (नागभय निवारण स्तोत्रम्)

श्री मनसा देवी द्वादशनाम स्तोत्रम् (नागभय निवारण स्तोत्रम्)

ओं नमो मनसायै ।

जरत्कारुर्जगद्गौरी मनसा सिद्धयोगिनी ।
वैष्णवी नागभगिनी शैवी नागेश्वरी तथा ॥ १ ॥

जरत्कारुप्रियाऽऽस्तीकमाता विषहरीती च ।
महाज्ञानयुता चैव सा देवी विश्वपूजिता ॥ २ ॥

द्वादशैतानि नामानि पूजाकाले च यः पठेत् ।
तस्य नागभयं नास्ति तस्य वंशोद्भवस्य च ॥ ३ ॥

नागभीते च शयने नागग्रस्ते च मन्दिरे ।
नागक्षते नागदुर्गे नागवेष्टितविग्रहे ॥ ४ ॥

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु मुच्यते नात्र संशयः ।
नित्यं पठेद्यस्तं दृष्ट्वा नागवर्गः पलायते ॥ ५ ॥

दशलक्षजपेनैव स्तोत्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम् ।
स्तोत्रं सिद्धिं भवेद्यस्य स विषं भोक्तुमीश्वरः ॥ ६ ॥

नागौघं भूषणं कृत्वा स भवेन्नागवाहनः ।
नागासनो नागतल्पो महासिद्धो भवेन्नरः ॥ ७ ॥

इति श्रीब्रह्मवैवर्तमहापुराणे प्रकृतिखण्डे पञ्चचत्वारिंशोऽध्याये श्री मनसादेवी द्वादशनाम स्तोत्रम् ॥


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