श्री पराङ्कुशाष्टकम्

श्री पराङ्कुशाष्टकम्

त्रैविद्यवृद्धजनमूर्धविभूषणं यत्
संपच्च सात्त्विकजनस्य यदेव नित्यम् ।
यद्वा शरण्यमशरण्यजनस्य पुण्यं
तत्संश्रयेम वकुलाभरणाङ्घ्रियुग्मम् ॥ १ ॥

भक्तिप्रभाव भवदद्भुतभावबन्ध
सन्धुक्षित प्रणयसाररसौघ पूर्णः ।
वेदार्थरत्ननिधिरच्युतदिव्यधाम
जीयात्पराङ्कुश पयोधिरसीम भूमा ॥ २ ॥

ऋषिं जुषामहे कृष्णतृष्णातत्त्वमिवोदितम् ।
सहस्रशाखां योऽद्राक्षीद्द्राविडीं ब्रह्मसंहिताम् ॥ ३ ॥

यद्गोसहस्रमपहन्ति तमांसि पुंसां
नारायणो वसति यत्र सशङ्खचक्रः ।
यन्मण्डलं श्रुतिगतं प्रणमन्ति विप्राः
तस्मै नमो वकुलभूषण भास्कराय ॥ ४ ॥

पत्युः श्रियः प्रसादेन प्राप्त सार्वज्ञ सम्पदम् ।
प्रपन्न जनकूटस्थं प्रपद्ये श्रीपराङ्कुशम् ॥ ५ ॥

शठकोपमुनिं वन्दे शठानां बुद्धिः दूषकम् ।
अज्ञानां ज्ञानजनकं तिन्त्रिणीमूल संश्रयम् ॥ ६ ॥

वकुलाभरणं वन्दे जगदाभरणं मुनिम् ।
यश्श्रुतेरुत्तरं भागं चक्रे द्राविड भाषया ॥ ७ ॥

नमज्जनस्य चित्त भित्ति भक्ति चित्र तूलिका
भवाहि वीर्यभञ्जने नरेन्द्र मन्त्र यन्त्रणा ।
प्रपन्न लोक कैरव प्रसन्न चारु चन्द्रिका
शठारि हस्तमुद्रिका हठाद्धुनोतु मे तमः ॥ ८ ॥

वकुलालङ्कृतं श्रीमच्छठकोप पदद्वयम् ।
अस्मत्कुलधनं भोग्यमस्तु मे मूर्ध्नि भूषणम् ॥ ९ ॥

इति श्रीपराशरभट्टराचार्य कृत श्री पराङ्कुशाष्टकम् ।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

कैटेगरी

आपके लिए रिपोर्ट्स

    अनुशंसित पूजा

      Ask Question

      आपके लिए खरीदारी

      आपके लिए रिपोर्ट्स

      त्रिलोक ऐप में आपका स्वागत है!

      image