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चालीसा
श्री राधा चालीसा का नियमित जाप करने से दिव्य प्रेम की अनुभूति होती है, मन को शांति मिलती है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरा भाव उत्पन्न होता है। प्रतिदिन इसका पाठ करने से जीवन में आनंद, प्रेम, समरसता और आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति होती है। राधा रानी की कृपा से जीवन में सद्भाव और अनंत आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
सनातन धर्म में प्रत्येक देवी-देवता के लिए विशेष प्रार्थना की रचना की गई है, उसी प्रकार राधा चालीसा परम प्रेम और भक्ति की मूर्ति श्री राधा रानी को समर्पित है। इसका नित्य पाठ करने से जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और सफलता आती है। राधा देवी अपनी करुणा से भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और आत्मबल प्रदान करती हैं। उनकी कृपा से हृदय में शांति और भक्ति का भाव उत्पन्न होता है, दुख और अंधकार दूर होते हैं। आइए, अब हम राधा चालीसा का पाठ करें और उनके अनंत प्रेम व कृपा का अनुभव प्राप्त करें।
श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।
वृंदाविपिन विहारिनी, प्राणावो बारंबार ॥
जैसो तैसो रावरो, कृष्ण प्रिया सुखधाम ।
चरण शरण निज दीजिए, सुंदर सुखदा ललाम ॥
जय वृषभानु कुंवारी श्री श्यामा । कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥
नित्य विहारिनी श्याम अधार । अमित बोध मंगल दातार ॥
रास विहारिनी रस विस्तारिन । सखि सुहागिनी मन भाविन ॥
नित्य किशोरी राधा गोरी । श्याम प्राणाधन अतिजिय भोरी ॥
करुणा सागरी हिय उमंगिनी । ललिता आदि सखियन संगिनी ॥
दिनकर कन्या कूल विहारिनी । कृष्ण प्राण प्रिया हिय हुलसावनी ॥
नित्य श्याम तुम्हारो गुण गावैं । श्री राधा राधा कहि हर्षावैं ॥
मुरली में नित नाम उचारें । तुम कारण लीला वपु धरेन ॥
प्रेमस्वरूपिणी अति सुकुमारी । श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी ॥
नव किशोरी अति छवि धामा । ज्योति लघु कोटि रति कामा ॥
गौरांगी शशि निंदक वदना । सुहाग चपल अनीयारे नैना ॥
जावक युत पद पंकज चरण । नूपुर ध्वनि प्रीतम मन हरन ॥
संतता सखि सेवा करहीं । महा मोद मंगल मन भरहीं ॥
रसिकन जीवन प्राण आधार । राधा नाम सकल सुख सार ॥
अगम अगोचर नित्य स्वरूप । ध्यान धरत निशिदिन ब्रजभूप ॥
उपजे जस अंश गुण खानी । कोटिन उमा रम ब्रह्माणी ॥
नित्य धाम गोलोक विहारिनी । जन रक्षक दुख दोष नाशिनी ॥
शिव अज मुनि सनकादिक नारद । पार न पाए शेष अरु शरद ॥
राधा शुभ गुण रूप उजारी । निरखि प्रसन्न हिय बनवारी ॥
ब्रज जीवन धन राधा रानी । महिमा अमित न जाई बखानी ॥
प्रीतम संग दिये गल बाहिन । विहरता नित वृंदावन माहिन ॥
राधा कृष्ण कृष्ण कहै राधा । एक रूप दउ प्रेम अगाधा ॥
श्री राधा मोहन मन हरनी । जन सुख प्रदा प्रफुल्लित बदनी ॥
कोटिन रूप धरे नंद नंदा । दरस करन हित गोकुल चंदा ॥
रास क्रीड़ा कर तुम रिझावें । मान करो जब अति दुख पावें ॥
प्रफुल्लित होत दरस जब पावें । विविध भांति नित विनय सुनावें ॥
वृंदारण्य विहारिणी श्यामा । नाम लेत पुरन सब कामा ॥
कोटिन यज्ञ तपस्या करहु । विविध नेम व्रत हिय में धरहु ॥
तौ न श्याम भक्तहि अन्हावें । जब लगि राधा नाम न गावें ॥
वृंदा विपिन स्वामिनी राधा । लीला वपु अमित अगाधा ॥
स्वयं कृष्ण पावै नहीं पारा । और तुम्हें को जानन हारा ॥
श्री राधा रस प्रीति अभेदा । सादर गान करत नित वेदा ॥
राधा त्यागी कृष्ण को भजिहैं । ते सपनेहु जग जलधि न तरिहैं ॥
कीरति कुमारी हुवारी राधा । सुमिरत सकल मिटहि भव बाधा ॥
नाम अमंगल मूल नसावन । त्रिविध ताप हर हरि मन भावन ॥
राधा नाम ले जो कोई । सहजहि दामोदर वश होई ॥
राधा नाम परम सुखदाई । भजतहि कृपा करें यदुराई ॥
यशुमति नंदन पीछे फिरेहैं । जो कौ राधा नाम सुमिरेहैं ॥
रास विहारिणी श्यामा प्यारी । करहु कृपा बरसाने वारी ॥
वृंदावन है शरण तुम्हारी । जय जय जय वृषभानु दुलारी ॥
श्री राधा सर्वेश्वरी, रसिकेश्वर धनश्याम ।
करहु निरंतर वास मैं, श्री वृंदावन धाम ॥
श्री राधा रानी सभी भक्तों को निर्मल भक्ति, आध्यात्मिक जागरण और अनंत प्रेम का आशीर्वाद प्रदान करें। उनका नाम ही एक ऐसा मंत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण से एकत्व का मार्ग खोलता है।
