श्री राम अष्टोत्तरनामावली

श्री राम अष्टोत्तरनामावली

श्री राम अष्टोत्तरनामावली को आप प्रतिदिन, विशेषकर मंगलवार, गुरुवार, शनिवार, रामनवमी, श्रीराम जन्मोत्सव, नवमी तिथि, पुष्य नक्षत्र या किसी भी शुभ कार्य से पहले पढ़ सकते हैं। इसे सुबह स्नान के बाद शांत मन से पढ़ना सबसे शुभ माना गया है, लेकिन आप इसे किसी भी समय श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ सकते हैं। श्री राम अष्टोत्तरनामावली पढ़ने से मन की शांति मिलती है, भय और नकारात्मकता दूर होती है, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है, जीवन में कठिनाइयाँ कम होती हैं, घर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा आती है, कार्य सिद्ध होने में सहायक होता है, तथा भगवान श्रीराम की कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।

 

 

ओं श्रीरामाय नमः ।
ओं रामभद्राय नमः ।
ओं रामचन्द्राय नमः ।
ओं शाश्वताय नमः ।
ओं राजीवलोचनाय नमः ।
ओं श्रीमते नमः ।
ओं राजेन्द्राय नमः ।
ओं रघुपुङ्गवाय नमः ।
ओं जानकीवल्लभाय नमः । ९

ओं जैत्राय नमः ।
ओं जितामित्राय नमः ।
ओं जनार्दनाय नमः ।
ओं विश्वामित्रप्रियाय नमः ।
ओं दान्ताय नमः ।
ओं शरणत्राणतत्पराय नमः ।
ओं वालिप्रमथनाय नमः ।
ओं वाग्मिने नमः ।
ओं सत्यवाचे नमः । १८

ओं सत्यविक्रमाय नमः ।
ओं सत्यव्रताय नमः ।
ओं व्रतधराय नमः ।
ओं सदाहनुमदाश्रिताय नमः ।
ओं कौसलेयाय नमः ।
ओं खरध्वंसिने नमः ।
ओं विराधवधपण्डिताय नमः ।
ओं विभीषणपरित्रात्रे नमः ।
ओं हरकोदण्डखण्डनाय नमः । २७

ओं सप्ततालप्रभेत्त्रे नमः ।
ओं दशग्रीवशिरोहराय नमः ।
ओं जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः ।
ओं ताटकान्तकाय नमः ।
ओं वेदान्तसाराय नमः ।
ओं वेदात्मने नमः ।
ओं भवरोगस्यभेषजाय नमः ।
ओं दूषणत्रिशिरोहन्त्रे नमः ।
ओं त्रिमूर्तये नमः । ३६

ओं त्रिगुणात्मकाय नमः ।
ओं त्रिविक्रमाय नमः ।
ओं त्रिलोकात्मने नमः ।
ओं पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः ।
ओं त्रिलोकरक्षकाय नमः ।
ओं धन्विने नमः ।
ओं दण्डकारण्यकर्तनाय नमः ।
ओं अहल्याशापशमनाय नमः ।
ओं पितृभक्ताय नमः । ४५

ओं वरप्रदाय नमः ।
ओं जितेन्द्रियाय नमः ।
ओं जितक्रोधाय नमः ।
ओं जितामित्राय नमः ।
ओं जगद्गुरवे नमः ।
ओं ऋक्षवानरसङ्घातिने नमः ।
ओं चित्रकूटसमाश्रयाय नमः ।
ओं जयन्तत्राणवरदाय नमः ।
ओं सुमित्रापुत्रसेविताय नमः । ५४

ओं सर्वदेवाधिदेवाय नमः ।
ओं मृतवानरजीवनाय नमः ।
ओं मायामारीचहन्त्रे नमः ।
ओं महादेवाय नमः ।
ओं महाभुजाय नमः ।
ओं सर्वदेवस्तुताय नमः ।
ओं सौम्याय नमः ।
ओं ब्रह्मण्याय नमः ।
ओं मुनिसंस्तुताय नमः । ६३

ओं महायोगिने नमः ।
ओं महोदाराय नमः ।
ओं सुग्रीवेप्सितराज्यदाय नमः ।
ओं सर्वपुण्याधिकफलाय नमः ।
ओं स्मृतसर्वाघनाशनाय नमः ।
ओं आदिपुरुषाय नमः ।
ओं परमपुरुषाय नमः ।
ओं महापुरुषाय नमः ।
ओं पुण्योदयाय नमः । ७२

ओं दयासाराय नमः ।
ओं पुराणपुरुषोत्तमाय नमः ।
ओं स्मितवक्त्राय नमः ।
ओं मितभाषिणे नमः ।
ओं पूर्वभाषिणे नमः ।
ओं राघवाय नमः ।
ओं अनन्तगुणगम्भीराय नमः ।
ओं धीरोदात्तगुणोत्तमाय नमः ।
ओं मायामानुषचारित्राय नमः । ८१

ओं महादेवादिपूजिताय नमः ।
ओं सेतुकृते नमः ।
ओं जितवाराशये नमः ।
ओं सर्वतीर्थमयाय नमः ।
ओं हरये नमः ।
ओं श्यामाङ्गाय नमः ।
ओं सुन्दराय नमः ।
ओं शूराय नमः ।
ओं पीतवाससे नमः । ९०

ओं धनुर्धराय नमः ।
ओं सर्वयज्ञाधिपाय नमः ।
ओं यज्विने नमः ।
ओं जरामरणवर्जिताय नमः ।
ओं विभीषणप्रतिष्ठात्रे नमः ।
ओं सर्वावगुणवर्जिताय नमः ।
ओं परमात्मने नमः ।
ओं परस्मै ब्रह्मणे नमः ।
ओं सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः । ९९

ओं परस्मै ज्योतिषे नमः ।
ओं परस्मै धाम्ने नमः ।
ओं पराकाशाय नमः ।
ओं परात्पराय नमः ।
ओं परेशाय नमः ।
ओं पारगाय नमः ।
ओं पाराय नमः ।
ओं सर्वदेवात्मकाय नमः ।
ओं परस्मै नमः । १०८


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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