ओं नमो भगवते श्रीरामचन्द्राय, स्मरणमात्र सन्तुष्टाय, महा भय निवारणाय, अयोध्यापुरवासिने, श्रीरामाय, महा मुनि परिवेष्टिताय, सकल देवता परिवृताय, कपिसेना शोभिताय, भक्तजनाऽज्ञान तमः पटल भञ्जनाय, ह्रां असाध्यसाधनाय, ह्रीं सर्वभूतोच्चाटनाय, ऐं सर्वविद्या प्रदाय, क्लीं जगत्त्रय वशीकरणाय, सौः भूमण्डलाधिपतये, रां चिरञ्जीवि श्रीरामाय, सर्वभूत प्रेत पिशाच राक्षस दानव मर्दन रामाय, रां रीं रूं रैं रौं रः मम सकल शत्रुसंहरण बडबानलरामायाघोररूपाय, हुं फट् स्वाहा ॥
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