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चालीसा
उद्देश्य: भगवान शिव (महादेव) की 40 पंक्तियों वाली यह स्तुति शांति, साहस, स्पष्टता और कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। इसमें लाभ, विधि और सरल पूजन क्रम भी शामिल हैं।
“हे भोलेनाथ, कृपा के सागर, मैं इस चालीसा का पाठ पूर्ण श्रद्धा से कर रहा हूँ। कृपया मुझे शांति, पवित्रता और मार्गदर्शन प्रदान करें तथा मेरे जीवन की बाधाएँ दूर करें।”
जय गणेश गिरिजा सुत, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
1) जय गिरिजा पति दीनदयाला, सदा करत संतन प्रतिपाला।
2) भाल चंद्रमा सोहत नीके, कानन कुण्डल नागफनी के॥
3) अंग गौर शिर गंग बहाए, मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
4) वस्त्र खाल बाघाम्बर सोहे, छवि को देख नाग मन मोहे॥
5) मैना मातु की ह्वै दुलारी, बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
6) कर त्रिशूल सोहत छवि भारी, करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
7) नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे, सागर मध्य कमल है जैसे॥
8) कार्तिक श्याम और गणराऊ, या छवि को कहि जात न काऊ॥
9) देवन जबहि जाय पुकारा, तबहि दुख प्रभु आप निवारा॥
10) किया उपद्रव तारक भारी, देवन सब मिल तुम्हें जुहारी॥
11) तुरंत षडानन आप पठायो, लवणिमेष महँ मारि गिरायो॥
12) आप जलंधर असुर संहारा, सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
13) त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई, सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
14) किया तपहिं भगीरथ भारी, पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरी॥
15) दानी मह तुम सम कोई नाहीं, सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
16) वेद में तुम्हारी महिमा गाई, अकथ अनादि भेद न पाई॥
17) प्रकटे उदधि मंथन में ज्वाला, जरत सुरासुर भए विहाला॥
18) कीन्ही दया तहाँ करी सहाई, नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
19) पूजन रामचंद्र जब कीन्हा, जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
20) सहस्र कमल में हो रहे धारी, कीन्ही परीक्षा तबहि पुरारी॥
21) एक कमल प्रभु राखे जोई, कमल नयन पूजन चाहें सोई॥
22) कठिन भक्ति देखि प्रभु शंकर, भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
23) जय जय जय अनंत अविनाशी, करत कृपा सबके घटवासी॥
24) दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं, भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवैं॥
25) त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो, यह अवसर मोहि आन उबारो॥
26) ले त्रिशूल शत्रुन को मारो, संकट ते मोहि आन उबारो॥
27) मात पिता भ्राता सब होई, संकट में पूछत नाहीं कोई॥
28) स्वामी एक है आस तुम्हारी, आय हरहु मम संकट भारी॥
29) धन निर्धन को देत सदा हीं, जो कोई माँगें सो फल पाहीं॥
30) अस्तोति कही विधि करि तुम्हारी, क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
31) शंकर हो संकट के नाशन, मंगल करन विघ्न विनाशन॥
32) योगी यति मुनि ध्यान लगावैं, नारद शारद शीश नवावैं॥
33) नमो नमो जय नमः शिवाय, सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
34) जो यह पाठ करे मन लाई, ता पर होत है शंभु सहाई॥
35) ऋण्यान जो कोई हो अधिकारी, पाठ करे सो पावन भारी॥
36) पुत्र होय कर इच्छा जोई, निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
37) पंडित त्रयोदशी को लावे, ध्यानपूर्वक होम करावे॥
38) त्रयोदशी व्रत करे हमेशा, ता के तन नहीं रहे कलेशा॥
39) धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे, शंकर समुख पाठ सुनावे॥
40) जन्म जन्म के पाप नसावे, अंत धाम शिवपुर में पावे॥
नित नेम उठि प्रभात ही, पाठ करो चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
“हे महादेव, इस पाठ का पुण्य सभी प्राणियों के कल्याण में लगे। मुझे पवित्र विचार, सच्चा कर्म और आपका निरंतर स्मरण प्रदान करें।”
