श्री शिवाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

श्री शिवाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

आप श्री शिवाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का पाठ प्रातः या सायंकाल, विशेषकर सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि या किसी भी शुभ तिथि पर शांत मन से कर सकते हैं। इसे शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर, जल या दूध अर्पित कर, और भगवान शिव का स्मरण करते हुए पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से साधक को शिवकृपा सहज रूप से प्राप्त होती है। जीवन की बाधाएँ, भय, मानसिक अशांति और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। यह स्तोत्र स्वास्थ्य, दीर्घायु, आध्यात्मिक उन्नति और कार्यसिद्धि प्रदान करता है। परिवार में सौहार्द्र बढ़ता है, व्यवसाय और नौकरी में स्थायित्व आता है और धन–संपत्ति की वृद्धि होती है। शिव से संबंधित ग्रहदोष—विशेषकर शनि, राहु, केतु और चंद्र—शांत होते हैं और जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सफलता आती है।

 

 

श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली >>

शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः ।
वामदेवो विरूपाक्षः कपर्दी नीललोहितः ॥ १ ॥

शङ्करः शूलपाणिश्च खट्वाङ्गी विष्णुवल्लभः ।
शिपिविष्टोऽम्बिकानाथः श्रीकण्ठो भक्तवत्सलः ॥ २ ॥

भवः शर्वस्त्रिलोकेशः शितिकण्ठः शिवाप्रियः ।
उग्रः कपाली कामारिः अन्धकासुरसूदनः ॥ ३ ॥

गङ्गाधरो ललाटाक्षः कालकालः कृपानिधिः ।
भीमः परशुहस्तश्च मृगपाणिर्जटाधरः ॥ ४ ॥

कैलासवासी कवची कठोरस्त्रिपुरान्तकः ।
वृषाङ्को वृषभारूढो भस्मोद्धूलितविग्रहः ॥ ५ ॥

सामप्रियः स्वरमयस्त्रयीमूर्तिरनीश्वरः ।
सर्वज्ञः परमात्मा च सोमसूर्याग्निलोचनः ॥ ६ ॥

हविर्यज्ञमयः सोमः पञ्चवक्त्रः सदाशिवः ।
विश्वेश्वरो वीरभद्रो गणनाथः प्रजापतिः ॥ ७ ॥

हिरण्यरेता दुर्धर्षो गिरीशो गिरिशोऽनघः ।
भुजङ्गभूषणो भर्गो गिरिधन्वी गिरिप्रियः ॥ ८ ॥

कृत्तिवासाः पुरारातिर्भगवान् प्रमथाधिपः ।
मृत्युञ्जयः सूक्ष्मतनुर्जगद्व्यापी जगद्गुरुः ॥ ९ ॥

व्योमकेशो महासेनजनकश्चारुविक्रमः ।
रुद्रो भूतपतिः स्थाणुरहिर्भुध्न्यो दिगम्बरः ॥ १० ॥

अष्टमूर्तिरनेकात्मा सात्त्विकः शुद्धविग्रहः ।
शाश्वतः खण्डपरशुरजः पाशविमोचकः ॥ ११ ॥

मृडः पशुपतिर्देवो महादेवोऽव्ययो हरिः ।
पूषदन्तभिदव्यग्रो दक्षाध्वरहरो हरः ॥ १२ ॥

भगनेत्रभिदव्यक्तः सहस्राक्षः सहस्रपात् ।
अपवर्गप्रदोऽनन्तस्तारकः परमेश्वरः ॥ १३ ॥

एवं श्री शम्भुदेवस्य नाम्नामष्टोत्तरंशतम् ॥


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

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