
दस महाविद्या, उनके भैरव और उनके विष्णु अवतार कौन से है ?

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पूजा
दस महाविद्या, उनके भैरव और उनके विष्णु अवतार कौन से है ?
कहते हैं इस दुनिया को शक्ति ही चलाती है। वे दस महाविद्याओं के रूप में अलग-अलग तरह का दायित्व निभाती है। उनका साथ देते हैं शिव स्वरूप भैरव। दस महाविद्या और उनके भैरव अलग-अलग है। जब माता सती ने भगवाव शिव के सामने अपना महत्व सिद्ध करने के लिए अपने 10 रूप दिखाए थे, तो इन्हें ही दस महाविद्या के नाम से जाना जाता है। इन 10 महाविद्या की पूजा गुप्त नवरात्र में की जाती है। इन सभी महाविद्याओं के साथ भगवाव शिव व भगवान विष्णु के भिन्न रूपों का भी संबंध है। यही दस महाविद्याएं नवग्रहों को कंट्रोल करती है। जानते हैं दस महाविद्याओं के भैरव कौन है, साथ ही उनके विष्णु अवतार कौन है।
दस महाविद्या और उनके भैरव
दस महाविद्या में माँ काली, तारा, त्रिपुरसुन्दरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला माता आती है। गुप्त नवरात्रि के दस दिनों में इन दस रूपों की क्रमशः इसी रूप में पूजा की जाती है। प्रत्येक रूप का अपना अलग महत्व व गुण होता है।
गुप्त नवरात्रि के समय महाविद्या की पूजा करने से उनकी शक्तियां हमारे अंदर समाहित होती है। मातारानी के जितने भी शक्तिपीठ स्थापित हैं, उन सभी के साथ-साथ महाकाल का भैरव मंदिर भी होता है। ऐसे में उनकी महाविद्या से भी एक-एक भैरव अवतार का संबंध है। आइए एक-एक करके सभी दस महाविद्या और उनके भैरव के बारे में जान लेते हैं।
- काली महाविद्या और उनके भैरव: महाकाल
- तारा महाविद्या और उनके भैरव: अक्षोभ्य
- षोडशी महाविद्या और उनके भैरव: कामेश्वर
- भुवनेश्वरी महाविद्या और उनके भैरव: सदाशिव या त्रयम्बक
- भैरवी महाविद्या और उनके भैरव: दक्षिणामूर्ति
- छिन्नमस्ता महाविद्या और उनके भैरव: कबंध
- धूमावती महाविद्या और उनके भैरव: कोई भैरव नहीं क्योंकि भगवान शिव द्वारा विधवा होने का श्राप
- बगलामुखी महाविद्या और उनके भैरव: मृत्युंजय या महारुद्र
- मातंगी महाविद्या और उनके भैरव: मतंग या एकवक्त्र
- कमला महाविद्या और उनके भैरव: नारायण या विष्णु
दस महाविद्या और ग्रह
अब हम सभी महाविद्या के साथ कौन-कौन से ग्रह संबंधित हैं, उनके नाम भी जान लेते हैं।
- महाविद्या काली व ग्रह: शनि
- महाविद्या तारा व ग्रह: गुरु
- महाविद्या षोडशी व ग्रह: बुध
- महाविद्या भुवनेश्वरी व ग्रह: चंद्रमा
- महाविद्या भैरवी व ग्रह: बृहस्पति
- महाविद्या छिन्नमस्ता व ग्रह: राहू
- महाविद्या धूमावती व ग्रह: केतु
- महाविद्या बगलामुखी व ग्रह: मंगल
- महाविद्या मातंगी व ग्रह: सूर्य
- महाविद्या कमला व ग्रह: शुक्र
यदि आपकी कुंडली में किसी ग्रह की दिशा या स्थिति सही नहीं है या आप उसे शांत करना चाहते हैं तो आप मातारानी के उसी रूप की पूजा कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर शनि ग्रह की शांति के लिए महाविद्या काली की साधना की जा सकती है, ठीक उसी तरह मंगल ग्रह के लिए माँ बगलामुखी की पूजा करें।
दस महाविद्या व रुद्र अवतार
महाविद्या का संबंध शिव के भैरव अवतार से ही नहीं बल्कि रुद्रावतार से भी होता है। ऐसे में शिवजी के भी 10 रुद्रावतार हैं जिनका संबंध प्रत्येक महाविद्या से है। आइए उनके बारे में भी जान लेते हैं।
- काली महाविद्या व रुद्र अवतार: महाकालेश्वर
- तारा महाविद्या व रुद्र अवतार: तारकेश्वर
- षोडशी महाविद्या व रुद्र अवतार: षोडेश्वर
- भुवनेश्वरी महाविद्या व रुद्र अवतार: भुवनेश्वर
- भैरवी महाविद्या व रुद्र अवतार: भैरवनाथ
- छिन्नमस्ता महाविद्या व रुद्र अवतार: दमोदेश्वर
- धूमावती महाविद्या व रुद्र अवतार: धूमेश्वर
- बगलामुखी महाविद्या व रुद्र अवतार: बग्लेश्वर
- मातंगी महाविद्या व रुद्र अवतार: मतंगेश्वर
- कमला महाविद्या व रुद्र अवतार: कमलेश्वर
प्रत्येक महाविद्या के नाम से ही संबंधित रुद्रावतार भी होता है। इस तरह से भगवान शिव ने मातारानी के प्रत्येक रूप के अनुसार ही अपना रूप धारण किया था जिसे रूद्र अवतार के नाम से जाना जाता है। इसमें सबसे मुख्य महाकालेश्वर रूद्र अवतार माना गया है।
10 महाविद्या व विष्णु अवतार
सभी दस महाविद्या का संबंध भगवान विष्णु से भी माना गया है। चूँकि महाविष्णु ने भी दस अवतार लिए हैं, इस तरह से प्रत्येक अवतार का उनके गुणों के अनुरूप हरेक महाविद्या से संबंध है। आइए जाने किन विष्णु अवतारों का किस महाविद्या के साथ संबंध है।
- महाविद्या काली व विष्णु अवतार: श्रीकृष्ण
- महाविद्या तारा व विष्णु अवतार: मत्स्य
- महाविद्या षोडशी व विष्णु अवतार: परशुराम
- महाविद्या भुवनेश्वरी व विष्णु अवतार: वामन
- महाविद्या भैरवी व विष्णु अवतार: बलराम
- महाविद्या छिन्नमस्ता व विष्णु अवतार: नृसिंह
- महाविद्या धूमावती व विष्णु अवतार: वराह
- महाविद्या बगलामुखी व विष्णु अवतार: कूर्म
- महाविद्या मातंगी व विष्णु अवतार: श्रीराम
- महाविद्या कमला व विष्णु अवतार: कल्कि
इन सभी में भगवान विष्णु के दो मुख्य अवतार रहे हैं जिनके नाम श्रीराम व श्रीकृष्ण है। श्रीराम का संबंध माता मातंगी के साथ तो वहीं श्रीकृष्ण का संबंध माता काली के साथ है। भगवान कल्कि कलियुग के अंत में जन्म लेंगे जिनका संबंध माता कमला के साथ होगा।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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