
त्रियुगीनारायण - जहां हुआ था माता पार्वती और भोलेनाथ का विवाह

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पूजा
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। पुराणों के मुताबिक, इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव और माता पार्वती ने सात फेरे कहां लिए थे? आइए जानते हैं उस पवित्र स्थान के बारे में।
त्रियुगीनारायण मंदिर: यहाँ हुआ था शिव-पार्वती का विवाह
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना त्रेता युग में हुई थी और यहाँ आज भी उस विवाह की गवाही देती 'अखंड धुनी' जल रही है।
विवाह की पौराणिक मान्यता
माता पार्वती राजा हिमावत की पुत्री थीं और उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी विवाह के लिए राजी हुए। जिस अग्नि को साक्षी मानकर उन्होंने सात फेरे लिए थे, माना जाता है कि वह ज्वाला त्रियुगीनारायण मंदिर में आज भी प्रज्वलित है।
विवाह में शामिल हुए थे भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिव्य विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी और सभी रीति-रिवाजों को पूरा किया था। वहीं, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी इस विवाह में पुरोहित बने थे। मंदिर के ठीक सामने स्थित ब्रह्म शिला इसी घटना की प्रतीक मानी जाती है।
पवित्र जल कुंडों का महत्व
विवाह से पहले देवी-देवताओं के स्नान के लिए यहाँ तीन विशेष जल कुंडों का निर्माण किया गया था:
- रुद्र कुंड
- विष्णु कुंड
- ब्रह्मा कुंड
इन कुंडों में पानी सरस्वती कुंड से आता है। मान्यता है कि सरस्वती कुंड की उत्पत्ति भगवान विष्णु की नासिका से हुई थी और यहाँ स्नान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि पर शीघ्र विवाह के अचूक उपाय
यदि आपके विवाह में विलंब हो रहा है या बाधाएं आ रही हैं, तो महाशिवरात्रि के दिन ये उपाय अत्यंत फलदायी सिद्ध हो सकते हैं:
1. अशोक सुंदरी वाला विशेष उपाय
एक बेलपत्र लें और उसे शिवलिंग के पास माता अशोक सुंदरी के स्थान पर रखें (यह स्थान जलाधारी के मध्य में होता है)। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। ऐसा करने से विवाह के योग शीघ्र बनने लगते हैं।
2. विवाह की बाधा दूर करने का मंत्र
महाशिवरात्रि के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर शिव-पार्वती की पूजा करें और उन्हें गेंदे के फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद "ऊँ गौरी शंकराय नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
3. योग्य जीवनसाथी के लिए रुद्राभिषेक
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अभिषेक करने से न केवल कार्यों में सफलता मिलती है, बल्कि एक योग्य और मनचाहा जीवनसाथी भी प्राप्त होता है। आप त्रियुगीनारायण मंदिर के दर्शन करके भी यह विशेष पूजा संपन्न कर सकते हैं।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
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