
उलटे हनुमान यहां करते हैं सभी की मनोकामना पूरी

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संकटमोचन हनुमान के देशभर में कई मंदिर हैं, जो अपनी पौराणिक कथाओं और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में से एक है इंदौर (मध्य प्रदेश) से 25 किलोमीटर दूर सांवेर में स्थित उल्टे हनुमान का मंदिर। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान हनुमान का सिर नीचे और पैर ऊपर की ओर हैं।
सांवेर के उल्टे हनुमान: रामायण काल से जुड़ा इतिहास
इस मंदिर का संबंध रामायण काल के एक विशेष प्रसंग से माना जाता है। जब राम-रावण युद्ध के दौरान अहिरावण छल से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया था, तब हनुमान जी उन्हें बचाने के लिए पाताल लोक गए थे।
- पाताल विजय का प्रतीक: माना जाता है कि पाताल लोक में प्रवेश करते समय हनुमान जी का सिर धरती की ओर और पैर आकाश की ओर थे। इसी स्मृति में यहाँ उनकी उल्टी प्रतिमा स्थापित की गई है।
- ऐतिहासिकता: यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है, जिसका इतिहास 13वीं सदी (सन् 1200) के आसपास का मिलता है।
हनुमान जी के पाताल जाने की कहानी
हनुमान जी की पाताल यात्रा साहस और बुद्धिमानी का एक अनूठा उदाहरण है। इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं:
1. मकरध्वज से युद्ध
पाताल के द्वार पर हनुमान जी का सामना द्वारपाल मकरध्वज से हुआ, जो दिखने में आधा वानर और आधा मगरमच्छ जैसा था। उसने स्वयं को हनुमान जी का पुत्र बताया।
- उत्पत्ति का रहस्य: मकरध्वज ने बताया कि लंका लांघते समय हनुमान जी के पसीने की एक बूंद समुद्र में एक मगरमच्छ के मुंह में गिरने से उसका जन्म हुआ था।
- पिता-पुत्र का द्वंद्व: हनुमान जी को अंदर जाने के लिए अपने ही पुत्र से युद्ध करना पड़ा और उसे हराने के बाद ही वे पाताल में प्रवेश कर सके।
2. अहिरावण का वध और पंचमुखी रूप
पाताल में पहुँचकर हनुमान जी ने पशु-पक्षियों की भाषा की मदद से श्रीराम और लक्ष्मण के गुप्त स्थान का पता लगाया। उन्हें ज्ञात हुआ कि अहिरावण तभी मर सकता है जब पाँच अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पाँच दीपकों को एक साथ बुझाया जाए।
यहीं पर हनुमान जी ने अपना पंचमुखी रूप धारण किया और एक साथ पाँचों दीपकों को बुझाकर अहिरावण का अंत किया और प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को मुक्त कराया।
धार्मिक महत्व और मनोकामना पूर्ति
सांवेर के उल्टे हनुमान मंदिर को लेकर भक्तों के बीच गहरी आस्था है। कहा जाता है कि यहाँ दर्शन मात्र से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
- विशेष फल: मान्यता है कि जो भक्त लगातार 3 या 5 मंगलवार तक यहाँ दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- पूजा विधान: मंगलवार को भगवान हनुमान को चोला चढ़ाने का विशेष महत्व है।
- प्राकृतिक सुंदरता: मंदिर परिसर में पीपल, नीम, तुलसी और बरगद के प्राचीन पेड़ हैं, जो यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं। साथ ही यहाँ कई प्राचीन संतों की समाधियाँ भी मौजूद हैं।
निष्कर्ष
यदि आप इंदौर या उसके आसपास हैं, तो सांवेर के इस चमत्कारी मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यह न केवल धार्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि हमें हनुमान जी की अटूट भक्ति और विजय गाथा की याद भी दिलाता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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