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विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह की जयंती इस साल भाद्रपद महीने की तृतीया तिथि यानी 6 सितंबर को मनाई जाएगी। भगवान वराह को पृथ्वी के रक्षक के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने पृथ्वी को गहरे समुद्र से निकालकर फिर से अंतरिक्ष में स्थापित किया। कई जगहों पर वराह को पृथ्वी के स्वामी के रूप में भी पूजा जाता है। उनकी एक पत्नी का नाम वसुंधरा यानी पृथ्वी है। आइए जानते हैं वराह जयंती की कथा क्या है? और वराह पूजा कैसे होती है और इसके क्या लाभ है?
एक बार हिरण्याक्ष नाम के एक राक्षस ने पृथ्वी को समुद्र में गहरे पानी में छिपा दिया। जब देवताओं ने पृथ्वी को जलमग्न देखा, तब भगवान विष्णु से उसे बचाने की प्रार्थना की। तब विष्णु श्री ब्रह्माजी की नाक से वराह के रूप में अवतार लिया। इसके बाद उन्होंने विशाल रूप धारण करके पृथ्वी को जल से बाहर निकाला और हिरण्याक्ष का वध किया। कहते हैं इसके बाद भगवान वराह ने ही अपने खूरों से पृथ्वी पर चल को स्तंभित कर दिया और समुद्रों की रचना की।
दक्षिण भारत में वराह जयंती को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। लोग सुबह उठकर पूजा का संकल्प लेते हैं और वराह के मंत्रों का जाप करते हैं। यदि आप भी वराह जयंती पर श्री विष्णु के इस विशेष अवतार की पूजा से लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप यह करें-
- सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान वराह की पूजा का संकल्प लें।
- भगवान वराह की मूर्ति को पंच द्रव्य या फूलों के रस से अभिषेक करें या करवाएं ।
- इस दौरान भगवान वराह के मंत्रों का जाप करें।
- भगवान वराह के लिए यज्ञ और हवन करवाएं।
- ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को सामान का दान करें।
- ॐ नमो श्रीवराहाय धरण्युद्धारणाय स्वाहा
- ॐ वराहाय नमः
- ॐ सूकराय नमः
- ॐ धृतसूकररूपकेशवाय नमः
- वराह मंत्र को संकल्प लेकर जपना चाहिए।
- एक निश्चित संख्या में मंत्र जाप करना चाहिए।
- यदि आप किसी विशेष मनोकामना के लिए वराह मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो आप कम से कम 1.25 लाख मंत्र जरूर जपें।
- प्रतिदिन एक निश्चित समय पर वराह मंत्र का जाप करें।
- वराह पूजा से जमीन जायदाद संबंधी परेशान दूर होती है।
- यदि आपका घर अभी तक नहीं बना है, तो आपको श्री वराह भगवान के मंत्र जाप जरूर करना चाहिए।
- कोर्ट केस में विजय प्राप्त करने के लिए भी श्री वराह भगवान की पूजा जरूर करना चाहिए।
- धन, धान्य और संपदा के लिए श्री वराह पूजा से लाभ होता है।
भूमि या भवन प्राप्ति के लिए भगवान वराह की उपासना और उनका ध्यान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यदि आप बिना किसी पूजा के केवल श्री वराह का ध्यान करते हैं, तो आपको लाल रंग के आभूषणों से युक्त और सहस्रदल कमल पर विराजित देखना चाहिए। उनके नेत्र अत्यधिक सुंदर हैं और उनका मुख वराह के समान सौम्य है। उनके हाथ में शंख, चक्र, गदा और कमल हैं। वसुंधरा यानी भूदेवी उनकी गोद में विराजमान हैं। वे संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं। अपने ध्यान में भगवान वराह की इस तरह के प्रतिरूप का ध्यान करने से भी मनचाही मुराद पूरी हो सकती है।
