श्री वासवी स्तोत्रम्

श्री वासवी स्तोत्रम्

कैलासाचलसन्निभे गिरिपुरे सौवर्णशृङ्गे मह-
स्तंभोद्यन् मणिमण्टपे सुरुचिर प्रान्ते च सिंहासने ।
आसीनं सकलाऽमरार्चितपदां भक्तार्ति विध्वंसिनीं
वन्दे वासवि कन्याकं स्मितमुखीं सर्वार्थदामम्बिकाम् ॥ १ ॥

नमस्ते वासवी देवी नमस्ते विश्वपावनि ।
नमस्ते व्रतसम्बद्धा क्ॐआत्रे ते नमो नमः ॥ २ ॥

नमस्ते भयसंहारी नमस्ते भवनाशिनि ।
नमस्ते भाग्यदा देवी वासवी ते नमो नमः ॥ ३ ॥

नमस्ते अद्भुतसन्धाना नमस्ते भद्ररूपिणी ।
नमस्ते पद्मपत्राक्षी सुन्दराङ्गी नमो नमः ॥ ४ ॥

नमस्ते विबुधानन्दा नमस्ते भक्तरञ्जनी ।
नमस्ते योगसम्युक्ता वाणिक्यान्या नमो नमः ॥ ५ ॥

नमस्ते बुधसंसेव्या नमस्ते मङ्गलप्रदे ।
नमस्ते शीतलापाङ्गी शाङ्करी ते नमो नमः ॥ ६ ॥

नमस्ते जगन्माता नमस्ते कामदायिनी ।
नमस्ते भक्तनिलय़ा वरदे ते नमो नमः ॥ ७ ॥

नमस्ते सिद्धसंसेव्य़ा नमस्ते चारुहासिनी ।
नमस्ते अद्भुतकल्याणी शर्वाणी ते नमो नमः ॥ ८ ॥

नमस्ते भक्तसंरक्ष-दीक्षासम्बद्धकङ्कणा ।
नमस्ते सर्वकाम्यार्थ वरदे ते नमो नमः ॥ ९ ॥

देवीं प्रणम्य सद्भक्त्या सर्वकाम्यार्थ सम्पदान् ।
लभते नाऽत्र सन्देहो देहन्ते मुक्तिमान् भवेत् ॥ १० ॥

श्रीमाता कन्यका परमेश्वरी देव्यै नमः ।


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