पंचांग गणना: साल 2025 में महीने के अनुसार विवाह के सभी शुभ मुहूर्त
पाठकों की त्वरित समझ और सर्च इंजन क्रॉलर्स की सुगम इंडेक्सिंग के लिए साल 2025 के सभी शुभ विवाह मुहूर्तों की सूची महीने के अनुसार नीचे कड़ाई से सुव्यवस्थित की गई है:१. जनवरी 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
साल 2025 के शुरुआती महीने जनवरी में विवाह के लिए कई उत्तम दिन उपलब्ध हैं। इस महीने में शुभ तिथियां निम्नलिखित हैं:- 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 जनवरी 2025
२. फरवरी 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
फरवरी का महीना शादियों के लिए बहुत ही व्यस्त और शुभ रहने वाला है। इस महीने में शहनाई बजाने के लिए सबसे ज्यादा मुहूर्त मिल रहे हैं:- 2, 3, 6, 7, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 23 और 25 फरवरी 2025
३. मार्च 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
मार्च महीने के शुरुआती दिनों में ही शादी-ब्याह के शुभ योग बन रहे हैं, जिसके बाद ग्रहों की स्थिति बदलेगी:- 1, 2, 6, 7 और 12 मार्च 2025
४. अप्रैल 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
अप्रैल के महीने में मीन राशि की संक्रांति (खरमास) समाप्त होने के बाद शहनाई गूंजना दोबारा शुरू होगी। इस महीने में कुल 9 शादी के विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं:- 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29 और 30 अप्रैल 2025
५. मई 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
मई के महीने में भी मांगलिक कार्यों के लिए सितारों का पूरा साथ मिलेगा। इस महीने की शुभ तिथियां इस प्रकार हैं:- 1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 27 और 28 मई 2025
६. जून 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
जून के शुरुआती सप्ताह में विवाह संपन्न करने के लिए पंचांग के अनुसार कुछ बेहद खास दिन मिल रहे हैं:- 2, 4, 5, 7 और 8 जून 2025
७. नवंबर 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
चातुर्मास की लंबी समाप्ति और देवउठनी एकादशी के जाग्रत होने के बाद नवंबर से दोबारा शुभ मांगलिक कार्य शुरू होंगे। इस महीने में शादियों के बंपर मुहूर्त हैं:- 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 नवंबर 2025
८. दिसंबर 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 के अंतिम महीने दिसंबर में खरमास लगने से पहले विवाह संपन्न करने के लिए केवल ३ कड़े मुहूर्त ही उपलब्ध रहेंगे:- 4, 5 और 6 दिसंबर 2025
चातुर्मास नियम: साल 2025 में इन चार महीनों में क्यों नहीं होगी कोई भी शादी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 के मध्य में **जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर** के महीनों में विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं रहेगा। इस पूरी अवधि के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और कड़े संस्कारों पर पूरी तरह से रोक रहती है।- धार्मिक कारण (भगवान विष्णु का निद्राकाल): धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक साक्षात सृष्टि के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस संवेदनशील समय को **'चातुर्मास' (Chaturmas)** कहा जाता है। चूंकि इस समय भगवान निद्राकाल में रहते हैं, इसलिए इस अवधि में किए गए विवाह आदि शुभ कार्यों को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है। यद्यपि इस दौरान हिंदू धर्म के कई बड़े व्रत और त्योहार (जैसे रक्षाबंधन, नवरात्रि, दीपावली) अवश्य आते हैं, परंतु व्यक्तिगत मांगलिक संस्कार वर्जित रहते हैं।
- वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण: हमारे पूजनीय ऋषि-मुनियों ने बेहद सोच-समझकर और वैज्ञानिक दृष्टि से ही प्रकृति के अनुकूल सारे नियम बनाए हैं। चातुर्मास की यह अवधि भारत में मुख्य रूप से **मानसून सीजन (वर्षा ऋतु)** की होती है। अत्यधिक बारिश, बाढ़, संक्रामक बीमारियों के फैलने के कड़े खतरे और आवागमन में कठीन बाधाओं के कारण इस मौसम में विवाह जैसे बड़े सामूहिक और भव्य आयोजनों को सुरक्षित ढंग से करना व्यावहारिक रूप से किसी के लिए भी बेहद मुश्किल रहता है।
ज्योतिष शास्त्र: विवाह मुहूर्त 2025 के लिए कौन-से नक्षत्र माने जाते हैं सबसे शुभ?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, लग्न और तिथि शुद्धि के साथ-साथ सही नक्षत्र का चयन वैवाहिक जीवन की नींव को मजबूत और कड़ाई से अटूट बनाता है। इन जाग्रत नक्षत्रों में विवाह करने से पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बना रहता है और वैवाहिक जीवन पूरी तरह से सफल होता है। विवाह के लिए सबसे उत्तम और प्रामाणिक नक्षत्रों के नाम निम्नलिखित हैं:- रोहिणी, मृगशीर्ष, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र।
शीघ्र विवाह का अचूक महाउपाय: यदि आपके या आपके परिवार के किसी जातक के जीवन में विवाह संबंधी कोई कठीन परेशानियां आ रही हैं, योग्य रिश्ते आने में बार-बार बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं, या प्रेम विवाह में कड़े गतिरोध बने हुए हैं, तो उन्हें पंचांग के शुभ समय में साक्षात माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित **'पार्वती स्वयंवरा पूजा' (Parvati Svayamvara Puja)** अनुष्ठान में कड़ाई से जरूर भाग लेना चाहिए। साल 2025 और 2026 की ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस सात्विक पूजा के प्रभाव से कुंडली के सभी मारक दोष, मांगलिक दोष और ग्रहों की कड़वी दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। जीवन में शुभ कार्यों के रास्ते स्वतः ही खुल जाते हैं और जातक का पूरा घर सदा उत्तम आरोग्यता, अखंड सुख-समृद्धि व स्थायी सौभाग्य की बहार से खिल उठता है।


