दीपदान क्या होता है ? कैसे दीपदान करते हैं और इसके क्या फल होते हैं ?

दीपदान क्या होता है ? कैसे दीपदान करते हैं और इसके क्या फल होते हैं ?

दीपदान क्या होता है ? कैसे दीपदान करते हैं और इसके क्या फल होते हैं ?

लगभग सभी पुराणों में दीपदान को बेहद शुभ और तुरंत फल देने वाला माना गया है। दरअसल दीपदान का मतलब होता है, दीप जलाकर किसी विशेष स्थान पर रखना। यह विशेष स्थान घर की छत, मंदिर, कुआं, चौराहा, किसी पेड़ के पास, नदी किनारे, तालाब की पाल पर या समुद्र के सामने कुछ भी हो सकता है। अक्सर नदी के तट पर किया जाने वाला दीपदान काफी शुभ माना जाता है। दीपदान करके भगवान से प्रार्थना करके दुख, दुर्भाग्य और दारिद्रय को दूर किया जा सकता है।

कब करें दीपदान

अक्सर लोग दीपदान कब करने को लेकर परेशान रहते हैं। आमतौर पर दीपदान रोजाना किया जा सकता है। यदि आप रोजाना नहीं कर सकते हैं, तो पंचमी, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और किसी त्यौहार पर दीपदान कर सकते हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार अपने जन्म नक्षत्र के दिन भी शिव या विष्णु मंदिर में दीपदान करना काफी लाभप्रद रहता है।

किस दीपक, बत्ती से करें दीपदान

आमतौर पर दीपदान मिट्टी के दीपक में किया जा सकता है, लेकिन कुछ जगह पर चांदी या सोने से बना दीपक भी आप लगा सकते हैं। दीपक में गाय के शुद्ध घी का उपयोग करना चाहिए। यदि घी उपलब्ध नहीं है, तो तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है। बत्ती को आप सीधी खड़ी या लंबी भी रख सकते हैं। भगवान शिव के लिए सफेद रंग की बत्ती का उपयोग करना चाहिए। नारायण के लिए सफेद या पीली बत्ती का उपयोग करना चाहिए। हनुमानजी और माता दुर्गा के लिए लाल रंग की बत्ती का उपयोग करना चाहिए। माता लक्ष्मी के लिए सफेद बत्ती का प्रयोग करना चाहिए। ग्रहों के लिए भी दीपदान किया जा सकता है।

कितनी देर के लिए होना चाहिए दीपदान

यदि आप घर पर दीपदान कर रहे हैं, तो करीब 2-3 घंटे तक इसे प्रज्वलित रहना चाहिए। यदि आप किसी मंदिर सहित किसी अन्य जगह पर दीपदान कर रहे हैं, तो आप इसे पूरा घी या तेल से भरकर जलाकर रखेँ। मंदिर या किसी स्थान पर किया जाने वाला दीपदान सीधे धरती पर ना रखें। इसे या तो किसी पवित्र पेड़ के पत्ते या हो सकें तो गेहूं या चावल पर रखना चाहिए।

दीपदान के लाभ

  •  अकाल मृत्यु और दुर्घटना से बचाव होता है।
  •  पितृों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  •  भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  •  मनोकामना जल्दी पूरी होती है।
  •  घर में धन समृद्धि बनी रहती है।
  •  संतान संबंधी सुखद समाचार प्राप्त होते हैं।
  •  गृहकलह और विवाद समाप्त होते हैं।
  •  जीवन में मुसीबत आने पर मार्गदर्शन मिल जाता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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