क्या होता है सूतक काल, क्या रखना होगा ध्यान

क्या होता है सूतक काल, क्या रखना होगा ध्यान

क्या होता है सूतक काल, क्या रखना होगा ध्यान

जब भी सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण की बात होती है, तो स्वभाविक रूप से हमारे मन में सूतक काल का विचार आता है। सूतक केवल एक परंपरा मात्र नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान, ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे एक विशेष और महत्वपूर्ण समय माना गया है। यह वह अवधि होती है जब प्रकृति की सूक्ष्म ऊर्जा-तरंगों में परिवर्तन होते हैं, जिनका प्रभाव मनुष्य के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर अनुभव किया जा सकता है।

सूतक काल का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में सूतक काल को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल वह अवधि होती है जो ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले आरंभ हो जाती है और ग्रहण की समाप्ति के साथ ही समाप्त हो जाती है। बता दें कि सूतक काल को अशुभ माना जाता है इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श करना, मंदिर जाना, तथा विवाह या मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार करना वर्जित होता है।

क्या सूतक काल मान्य होगा?

मार्च 2026 में लगने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। चंद्र ग्रहण 2026 के शुरू होने से 9 घंटे पूर्व सूतक लग जाएगा। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा व्याप्त होती है इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचें।

सूतक काल के दौरान क्या करें और क्या न करें?

सूतक में क्या करें ना करें ?

  • सूतक में किसी भी प्रकार का मांगलिक या शुभ कार्य करने से बचें।
  • विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य आदि की शुरुआत न करें।
  • सूतक काल में भोजन पकाने या आवश्यक न होने पर बाहर जाने से परहेज़ करें।

सूतक में क्या करें?

  • सूतक शुरू होने से पूर्व स्नान करें।
  • ग्रहण काल के दौरान ध्यान, स्तोत्र-पाठ, हवन और मंत्र जाप जैसे धार्मिक कार्य करें।
  • ग्रहण की समाप्ति होने के पश्चात फिर से स्नान करें जिससे आपका तन-मन शुद्ध हो सकें।
  • इस समय दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

सूतक में इन बातों का भी ध्यान रखें -

सूतक के दौरान धार्मिक स्थल जैसे मंदिर में प्रवेश न करें और न ही भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करें। सूतक के समय भोजन करने से बचें, विशेष रूप से पकाई हुई चीजें को खाने से परहेज़ करें। इस अवधि में शारीरिक संबंध बनाने से बचें। सूतक में न तो आप तेल मालिश करें और न ही बाल या नाखून काटें। यात्रा तब ही करें, अगर वह जरूरी हो। इस समय में बच्चे, वृद्ध और रोगी भोजन कर सकते हैं या फिर दवा ले सकते हैं। सूतक काल में 2026 के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करें। ग्रहण की अवधि में मंत्र जाप करना बहुत कल्याणकारी माना जाता है। परिवार का कोई सदस्य काफी बीमार होने की स्थिति में उसके लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। साथ ही, संकल्प करके दान करें।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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