
कब मनाई जाएगी लोहड़ी, क्या है इसका महत्व

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पूजा
कब मनाई जाएगी लोहड़ी, क्या है इसका महत्व
लोहड़ी के पर्व का बेहद खास महत्व होता है। यह त्योहार हर साल मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन शाम के वक्त सभी लोग अग्नि के चारों ओर चक्कर लगाते और नाचते, गाते नजर आते हैं। लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। वहीं, देश के कई हिस्सों में भी अब इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही लोहड़ी सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में भी मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं लोहड़ी कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका क्या महत्व है।
लोहड़ी 2026 कब है ?
हर वर्ष लोहड़ी की त्योहार मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। ऐसे में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को होने से इस बार लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा। बता दें कि 13 तारीख को शाम के 3 बजकर 18 मिनट तक भद्रा रहेगा। यह त्योहार पंजाब में सबसे लोकप्रिय है जो फसल की कटाई से जुड़ा हुआ है। साथ ही, लोहड़ी सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में भी मनाई जाती है। इससे अगले दिन यानी मकर संक्रांति को सूर्य का गोचर मकर राशि में होगा।
लोहड़ी का शुभ मुहूर्त
लोहड़ी के दिन प्रदोष काल में अग्नि प्रज्वलित करना सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम को 5 बजकर 44 मिनट का रहेगा। ऐसे में सूर्यास्त से 2 घंटे की अवधि लोहड़ी और अग्नि के पूजन के लिए सबसे शुभ रहेगा।
लोहड़ी पूजन विधि 2026
- लोहड़ी के दिन पहले लकड़ियां इकट्ठा कर लें और इन्हें अच्छी सजाएं। अब लकड़ियों पर गंगाजल या पवित्र जल छिड़कर उन्हें शुद्ध कर लें।
- लोहड़ी की लकड़ियों पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत आदि अर्पित करें और फिर, शाम को शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करके सभी साथ मिलकर उसकी परिक्रमा करें।
- अग्नि में गजक, मूंगफली, मक्का, गेहूं की बालियां आदि डालें और साथ-साथ परिक्रमा भी करते रहें। अब जीवन में सुख-शांति की कामना करें।
- मान्यता है कि लोहड़ी के दिन घर के छोटे बच्चों को अग्नि का धुआं जरूर लगाना चाहिए। ऐसा करने से नजर दोष दूर हो सकता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
लोहड़ी का क्या महत्व है?
इस पर्व के दिन से रात छोटी होनी शुरू हो जाती है और दिन बड़े होते हैं। लोहड़ी का त्योहार पारंपरिक तौर पर रबी फसल की कटाई से संबंधित है। इस दिन शाम के समय लोहड़ी की अग्नि की चारों ओर सभी मिलकर परिक्रमा करते हैं और नाचते, गाते हैं। अग्नि में तिल, गुड़, गजक आदि भी अर्पित किया जाता है। रबी की फसल को भी अग्नि में डाला जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने के खुशी में मनाते हैं। लोहड़ी के दिन कई जगहों पर पतंग उड़ाई जाती है और लड्डू बांटा जाता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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