1247
मंत्रों में अपार शक्ति हैं। यदि आप पूरी श्रद्धा और विश्वास से किसी भी मंत्र का जाप करते हैं, तो उसके परिणाम तुरंत ही प्राप्त होते हैं। वेदों और पुराणों में गायत्री मंत्र को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। वेदों में लिखा है गायत्री मंत्र में 24 अक्षर है और सभी अक्षर एक देवी या देवता का प्रतिनिधित्व करता है। इन देवी देवताओं के भी अलग गायत्री मंत्र हैं। कहते हैं जिस तरह की अभिलाषा हो, उस देवता के गायत्री मंत्र का जाप करके फिर एक माला गायत्री मंत्र की करने से समस्त प्रकार की मनोकामना तुरंत ही पूरी हो जाती है।
गायत्री मंत्र में 24 अक्षर हैं। इनमें 24 महाशक्तियों का अवतार कहा गया है। इनमें श्री गणेश, विष्णु, लक्ष्मी, नृसिंह, शिव, कृष्ण, राधा, अग्नि, इंद्र, सरस्वती, दुर्गा, हनुमानजी, पृथ्वी, सूर्य, राम, सीता, चंद्रमा, यम, ब्रह्मा, वरुण, नारायण, हयग्रीव, हंस और तुलसी की शक्ति शामिल है। हर तरह की शक्ति से अलग तरह की प्रार्थना और मनोकामनापूर्ति का आशीर्वाद लिया जाता है। गायत्री के परम उपासक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का कहना है कि व्यक्ति अपनी समस्त अभिलाषाओं को इन शक्तियों से प्राप्त कर सकता है। हर शक्ति का अपना गायत्री मंत्र है और इन मंत्रों के जाप के बाद गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। वेदों में गायत्री को ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और धन देने वाली मानी गई है। गायत्री मंत्र को महामन्त्र इसीलिए कहा जाता है।
श्रीगणेश - ( किसी भी मुश्किल से दूर निकालने के लिए, सफलता और बुद्धि के लिए गणेश गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। )
मंत्र - ॐ एकदृंष्ट्राय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात्।
*****
नृसिंह
(यदि नकारात्मकता ने बहुत ज्यादा घेर रखा है। शत्रु को हराना चाहते हैं। बहादुरी प्राप्त करने और भय दूर करने के लिए नृसिंह गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है।)
ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह प्रचोदयात्।
विष्णु
( पालन पोषण की क्षमता और अपने स्किल को बढ़ाने और लोगों की मदद के लिए विष्णु गायत्री का जाप किया जाता है।)
नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
शिव
(समस्त प्रकार के कल्याण के साथ, शुभता को बढ़ाने और अमंगल के नाश के लिए शिव गायत्री मंत्र का जाप किया जाना चाहिए। )
ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।
कृष्ण
( नि:स्वार्थ प्रेम, मोह से दूर रहने, सक्रिय और समर्पण के साथ खूबसूरती के लिए कृष्ण गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।)
ॐ देवकीनन्दाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
राधा
( प्रेम और भक्ति प्राप्ति, घृणा और द्वेष को दूर रखने के लिए राधा गायत्री मंत्र का जाप करें)
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।
लक्ष्मी
(पद, पैसा, यश और भौतिक सुख चाहिए, तो महालक्ष्मी के गायत्री मंत्र का जाप करें)
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।
अग्रि
( वीरता, प्रभावशीलता और तेजस्वी बनने के लिए अग्निदेव के गायत्री मंत्र का जाप करें।)
ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।
इन्द्र
( नकारात्मकता को दूर करने, भूत-प्रेत और अनिष्ट से रक्षा के लिए इंद्र देवता के गायत्री मंत्र का करना चाहिए)
ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात्।
सरस्वती
( बुद्धि, विवेक, दूरदर्शिता, और विद्या अध्ययन में लाभ के लिए सरस्वती गायत्री मंत्र का जाप करें)
ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।
दुर्गा
(शत्रुओं और विघ्नों के नाश के लिए माता दुर्गा के गायत्री मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता है)
ॐ गिरिजायै विद्महे शिव धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्।
हनुमानजी
(भक्ति, निष्ठा, संयम, नीडरता और दृढ़ संकल्प प्राप्त करने के लिए हनुमान गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए)
ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्।
पृथ्वी
( मजबूत इरादों के साथ सहनशीलता और क्षमाभाव को बढ़ाने वाला पृथ्वी गायत्री मंत्र बहुत ही सिद्ध मंत्र है।
ॐ पृथ्वी देव्यै विद्महे सहस्त्र मूर्त्यै धीमहि तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात्।
सूर्य
(आरोग्य प्राप्ति, लंबी आयु, तरक्की और उन्नति के लिए सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।
राम
(धर्म पालन, मर्यादा, स्वभाव में विनम्रता, मैत्री भाव की चाहत राम गायत्री मंत्र से पूरी होती है –
ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्।
सीता
(सीता गायत्री मंत्र से पवित्रता आती है। व्यक्ति दृढ़ संकल्पित बनता है। उसका स्वभाव सहनशील बनता है। )
ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि तन्नो सीता प्रचोदयात्।
चन्द्रमा
(सुख प्राप्ति, मन की दृढ़ता, प्रसन्नता, निराशा और शोक को दूर करने के लिए हमेशा चंद्र गायत्री का मंत्र का जाप करना चाहिए)
ॐ क्षीरपुत्रायै विद्महे अमृततत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्।
यम
( धर्म-कर्म में रुचि, दुर्घटना से बचाव, अकस्मात मृत्यु भय को दूर करने के लिए यम गायत्री मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ होता है। )
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यमः प्रचोदयात्।
ब्रह्मा
किसी भी तरह की रचनात्मकता प्राप्त करने के लिए आपको ब्रह्मा गायत्री का जाप करना करना चाहिए।
ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।
वरुण
(दया, करुणा, कला, सौंदर्य और भावुकता प्राप्त करने के लिए वरुण गायत्री का मंत्र शीघ्रफलदायी होता है।)
ॐ जलबिम्बाय विद्महे नीलपुरुषाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।
नारायण –
(समस्त महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए और दूसरे के लिए प्रेरणास्रोत बनने के लिए श्री नारायण गायत्री का जाप करें।)
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो नारायणः प्रचोदयात्।
हयग्रीव –
( बुरे वक्त को दूर करने, साहसी बनने, उत्साह बढ़ाने और मेहनत से सफलता प्राप्त करने के लिए हयग्रीव गायत्री मंत्र का जाप करें।)
ॐ वाणीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।
हंस –
(यश, कीर्ति, विवेक और बुद्धि प्राप्ति के लिए हंस गायत्री मंत्र का जाप करना प्रभावी रहता है।
ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि तन्नो हंसः प्रचोदयात्।
तुलसी –
सुखद वैवाहिक जीवन, परोपकार और नारायण भक्ति के लिए तुलसी गायत्री मंत्र का जाप करें।
सेवा भावना, सच्चाई को अपनाने, सुखद दाम्पत्य, शांति व परोपकारी बनने की चाहत तुलसी गायत्री मंत्र पूरी करता है –
ॐ श्री तुलस्यै विद्महे विष्णु प्रियायै धीमहि तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।
