
सावन में पहनें कौन सा रुद्राक्ष, जानिए रुद्राक्ष के बारे में सबकुछ

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ज्योतिष
सावन में पहनें कौन सा रुद्राक्ष, जानिए रुद्राक्ष के बारे में सबकुछ
सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू होने वाला है। भारतीय संस्कृति में ये पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने कई लोग रुद्राक्ष धारण करते हैं. ऐसे में यदि आप भी रूद्राक्ष पहनने वाले हैं तो चलिए जानते हैं कि सबसे अच्छा रुद्राक्ष कौन सा है?
विभिन्न धर्म ग्रंथों में है रूद्राक्ष का महत्व
हमारे विभिन्न धर्म शास्त्रों में रूद्राक्ष का महत्व समझाया गया है।
1 – शिव महापुराण के विशेश्वर संहिता के 25 वें अध्याय के प्रारंभ में ही सूत जी कहते हैं कि हे शौनक रुद्राक्ष शंकर जी को अत्यंत प्रिय है। इसके द्वारा जाप करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। सूत जी आगे कहते हैं कि रुद्राक्ष की महिमा सबसे पहले भगवान शिव ने लोक के कल्याणार्थ माता-पार्वती जी को सुनाई।
2 – शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने पार्वती जी को बताया कि तपस्या के दौरान उन्होंने एक बार अपने नेत्र खोल दिए थे। उन नेत्रों से आंसुओं की झड़ी लग गई थी। उन्हीं आंसुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए।
3 – पूजा पाठ करने वालों को सफेद रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
4 – पुरुषार्थ का कार्य करने वाले अर्थात सीमा के प्रहरी को लाल रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
5 – व्यापार करने वालों को पीला रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
6 – अन्य लोगों को काले रंग का रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष का शाब्दिक अर्थ क्या है
रुद्राक्ष का अर्थ रूद्र+अक्ष अर्थात भगवान शिव के आंखों का जल होता है। रुद्राक्ष अर्थात रुद्र का अक्ष अर्थात भगवान शिव की आंख है। इसके अलावा कुछ लोग अक्ष का अर्थ धार्मिक ज्ञान भी मानते हैं। इनके अनुसार रुद्राक्ष शब्द का अर्थ भगवान शिव के संबंध में ज्ञान है।
रुद्राक्ष धारण करने से क्या लाभ होता है?
रुद्राक्ष जितना अधिक छोटा होता है वह उतना ही अधिक फलदायी होता है। रुद्राक्ष धारण करने वाले को मांस, प्याज, लहसुन आदि में वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। श्री शिव महापुराण में इन रुद्राक्ष को धारण करने के लिए मंत्र बताए गए हैं। मंत्रों का उच्चारण करके ही रुद्राक्ष धारण करना चाहिए ।
- 1 – एक मुखी रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति समस्त बाधाओं से दूर हो जाता है।
- 2 – दो मुखी रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर रुद्राक्ष भी कहते हैं। यह व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है।
- 3 – तीन मुख वाला रुद्राक्ष साधन सिद्ध करता है।
- 4 – चार मुख वाले रुद्राक्ष से नर हत्या का पाप भी छूट जाता है।
- 5 – पंचमुखी रुद्राक्ष को कालाग्नि भी कहते हैं। यह शुभकामनाएं पूर्ण कर मोक्ष प्रदान करता है। सर्व कामनाएं पूर्ण करें मोक्ष प्रदान करता है।
- 6 – छह: मुखी रुद्राक्ष को स्वामी कार्तिकेय का रूप कहते हैं। इसको पहनने से का ब्रहम हत्या का पाप भी समाप्त हो जाता है।
- 7 – सप्त मुखी रुद्राक्ष धारण करने से धन की प्राप्ति होती है।
- 8 – अष्ट मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दीर्घायु प्राप्त होती है।
9 – नौ मुखी रुद्राक्ष को बाईं तरफ धारण करने से समस्त प्रकार के वैभव प्राप्त होते हैं।
- 10 – दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
- 11 – ग्यारह मुखी रुद्राक्ष आदित्य रूप है। इसे मस्तक पर धारण करने से व्यक्ति का तेज बहुत बढ़ जाता है।
- 12 – 12 मुखी रुद्राक्ष सूर्य के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करता है। अर्थात जिसकी कुंडली में सूर्य नुकसान हो रहा है। उन्हें 12 मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए। 12 मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति के व्यक्तित्व में तेज की वृद्धि करता है।
- 13 – 13 मुखी रुद्राक्ष विश्वदेव है। इसे धारण करें तो मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
- 14 – 14 मुखी रुद्राक्ष हनुमान जी का प्रतिरूप माना जाता है। इसको पहनने से व्यक्ति में साहस की वृद्धि होती है।
- 15 – 15 से इक्कीस मुखी तक के रुद्राक्ष कभी-कभी मिल जाते हैं और सामान्य व्यक्ति इनको नहीं पहन पाता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।